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    पृथ्वी दिवस विशेष: मां, तुझे सलाम

    Published: Fri, 21 Apr 2017 09:30 PM (IST) | Updated: Fri, 21 Apr 2017 09:35 PM (IST)
    By: Editorial Team
    world-earth-day 21 04 2017

    मनुष्य विकास के पथ पर बड़ी तेजी से अग्रसर है। उसने समय के साथ स्वयं के लिए सुख के सभी साधन एकत्र कर लिए हैं। बढ़ते विकास तथा समय के साथ आज हमारी असंतोष की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है।

    प्रकृति में ऊर्जा व संसाधन सीमित हैं, अतः यह आवश्यक हो गया है कि हम ऊर्जा संरक्षण की ओर विशेष ध्यान दें अथवा इसके प्रतिस्थापन हैतु अन्य संसाधनों को विकसित करें।

    पर्यावरण संकट की बढ़ती चिंता से प्रभावित होकर अमेरिकी सीनेटर जेराल्ड नेल्सन ने सर्वप्रथम 1970 में पर्यावरण संरक्षण के समर्थन में 22 अप्रैल को पृथ्वी दिवस के वार्षिक आयोजन की शुरुआत की थी। आज लगभग 192 से अधिक देशों प्रति वर्ष पृथ्वी दिवस मनाया जाता है।

    दिवस मनाने का उद्देश्य उसकी अहमियत को जनसामान्य तक लाना होता है। फिर पृथ्वी तो हमारी मां है जो हमारी सभी आवश्यक्‍ताओं को पूर्ण करती है। किन्तु मानव बहुत स्वार्थी है, वह सिर्फ विकास के चरम पर पहुंचना चाहता है।

    आज हम तेल रिसाव, प्रदूषण करने वाली फैक्ट्रियां और ऊर्जा संयंत्र, प्रदूषित जलमल, विषैले कचरे, कीटनाशक, जंगलों की क्षति, वन्य जीवों के विलोपन, मिसाइल टेस्ट और रासायनिक हथियारों के उपयोग से विभिन्न प्राकृतिक आपदा से गुजर रहे हैं। प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा हैI

    श्रीमद भागवत में कहा गया है कि वास्तव में कुछ भी शेष नहीं रह जाएगा। हमें यह याद रखना होगा कि हम प्रकृति के अनुपम उपहारों से लबरेज हैं। हमे चन्द्रमा को धन्यवाद देना चाहिए जो अंधेरी रात को सुन्दर चांदनी रात में बदल देता है, हर उस पेड़ पौधे के प्रति आभार व्यक्त करना होगा जो हमारे लिए अपने जीवन से समझौता करते हैं।

    पेड़ इंसान को सहायता देने के लिए और जानवर प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए हैं। इसलिए हमें सभी सजीवों के बारे में सोचना चाहिए जो किसी न किसी रूप में हमारे सहायक है।

    क्या हम प्रकृति के बगैर जीवन की कल्पना कर सकते है? दुनिया की रचना करने वाले ने सभी चीजों का क्रमिक व्यवस्थापन कर रखा है। अतः यह आवश्यक है कि हम आज पृथ्वी दिवस पर ऊर्जा संरक्षण की ओर विशेष ध्यान दे अथवा प्रतिस्थापन हेतु अन्य संसाधनों को विकसित करें, क्योंकि यदि समय रहते हम अपने प्रयासों में सफल नहीं होते तो सम्पूर्ण मानव सभ्यता ही खतरे में पड़ सकती है।

    पृथ्वी पर ऐसे ऊर्जा संसाधनों की कमी नहीं जो प्रदूषण रहित है। सभी नागरिको को ऊर्जा के महत्व को समझना होगा और ऊर्जा संरक्षण के प्रति जागरूक बनना होगा, तभी हम हमारी धरती मां को सुरक्षित कर सकते हैं। अगर हमें पृथ्वी को बचाना है तो हमे कार्बन उत्सर्जन में कटौती पर ध्यान केंद्रित करना होगा।

    औद्योगिक रूप से विकसित देशों को व्यापक कार्बन कटौती के लिए राज़ी नहीं किया गया तो पृथ्वी का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।

    - नमिता दुबे

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