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    गोमती रिवर फ्रंट घोटालाः आठ इंजीनियरों पर मुकदमा

    Published: Tue, 20 Jun 2017 12:38 AM (IST) | Updated: Wed, 21 Jun 2017 08:38 AM (IST)
    By: Editorial Team
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    लखनऊ। गोमती रिवर फ्रंट घोटाले में आखिरकार शासन के आदेश पर सोमवार को एफआईआर दर्ज करा दी गई। अधिशासी अभियंता शारदा नहर, लखनऊ खंड की तहरीर पर गोमतीनगर थाने में आठ इंजीनियरों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। इनमें चार सेवानिवृत हो चुके हैं।

    खास बात यह है कि करोड़ों के घोटाले में किसी भी नौकरशाह या सफेदपोश का नाम नहीं है। इंस्पेक्टर गोमतीनगर सुजीत कुमार दुबे के मुताबिक सभी आरोपितों के खिलाफ धोखाधड़ी, वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत एफआइआर दर्ज की गई है। पुलिस को तहरीर के साथ 74 पेज की जांच रिपोर्ट दी गई है।

    इनके खिलाफ हुई रिपोर्ट

    - गुलेश चंद्र, तत्कालिन मुख्य अभियंता (सेवानिवृत)

    -एसएन शर्मा, तत्कालिन मुख्य अभियंता

    -काजिम अली, तत्कालीन मुख्य अभियंता

    -शिव मंगल यादव, तत्कालिन अधीक्षण अभियंता (सेवानिवृत)

    -अखिल रमन, तत्कालिन अधीक्षण अभियंता (सेवानिवृत)

    -कमलेश्वर सिंह, तत्कालिन अधीक्षण अभियंता

    -रूप सिंह यादव, तत्कालिन अधिशासी अभियंता/अधीक्षण अभियंता (सेवानिवृत)

    -सुरेंद्र यादव, अधिशासी अभियंता

    न्यायिक जांच में मिले दोषी

    घोटाले की न्यायिक जांच के लिए उच्च न्यायालय इलाहाबाद के सेवानिवृत न्यायधीश आलोक कुमार सिंह की अध्यक्षता में जांच समिति बनाई गई थी। समिति में विशेषज्ञ के रूप में इंजीनियरिग एवं वित्त संकाय के प्रोफेसर शामिल थे। समिति से तथ्यों के आधार पर जांच कर निष्कर्ष मांगा गया था। जांच समिति ने 15 मई को शासन को आख्या प्रस्तुत कर दी थी। जांच में परियोजना के क्रियान्वयन में विभिन्न अनियमितताओं का उल्लेख किया गया। साथ ही दोषी अधिकारियों के बारे में प्रथम दृष्टया निष्कर्ष दिए गए हैं।

    जांच रिपोर्ट का कर रहे अध्ययन पुलिस के मुताबिक उन्हे 74 पन्ने की न्यायिक जांच रिपोर्ट मिली है, जिसका अध्ययन किया जा रहा है। रिपोर्ट पढ़ने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों और विधिक सलाहकारों से सुझाव लिया जाएगा। इसके आधार पर आरोपितों के खिलाफ अन्य धाराओं की बढ़ोतरी की संभावना है।

    बड़े अफसरों व नेताओं का नाम गायब

    परियोजना में गड़बड़ी के लिए दोषी पाए जिन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है, उसमे किसी अफसर और नेता का नाम नहीं है। परियोजना की डिजाइन तैयार करने वाले आर्किटेक्ट का नाम भी तहरीर में नहीं है।

    इस परियोजना का खाका खींचने वाले एक आईएएस अधिकारी का नाम भी एफआईआर में नहीं है, जबकि शुरुआती दौर में इन्हीं अधिकारी की देख-रेख में ही सारी डिजाइन तैयार की गई थी।

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