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    बच्ची की मौत हत्या से कम नहीं, फोर्टिस अस्पताल दोषी, दर्ज होगी FIR

    Published: Wed, 06 Dec 2017 09:56 PM (IST) | Updated: Wed, 06 Dec 2017 10:09 PM (IST)
    By: Editorial Team
    anil vij india 6 12 17 06 12 2017

    चंडीगढ़। डेंगू से बच्ची की मौत और परिजनों से करीब 16 लाख रुपये के बिल वसूली मामले में गुरुग्राम का फोर्टिस अस्पताल दोषी निकला है। हरियाणा के स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. राजीव वढ़ेरा की अध्यक्षता वाली कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर प्रदेश सरकार अस्पताल के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराएगी।

    अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश के साथ ही ब्लड बैंक का लाइसेंस रद्द करने के लिए नोटिस जारी कर दिया गया है। सरकार ने इस रिपोर्ट के आधार पर माना है कि बच्ची की मौत सामान्य नहीं, बल्कि हत्या के समान है। शर्तों के मुताबिक मरीजों को सस्ता इलाज नहीं देने के लिए स्वास्थ्य विभाग अस्पताल की जमीन की लीज रद कराने के लिए हुडा (हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण) को पत्र लिखेगा।

    इसके अलावा डेंगू की सूचना सीएमओ को नहीं देने पर भी अस्पताल प्रबंधन को नोटिस थमाया गया है। अस्पताल के खिलाफ केस धारा 304 (लापरवाही से मौत) के तहत दर्ज होगा। लंबे इंतजार के बाद स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव अमित झा ने डॉ. वढ़ेरा की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय कमेटी की 50 पेज की रिपोर्ट बुधवार को हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को सौंप दी।

    इसके तुरंत बाद पत्रकारों से रूबरू स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि दिल्ली की सात वर्षीया आद्या सिंह की मौत के लिए फोर्टिस अस्पताल का प्रबंधन जिम्मेदार है। विज ने यहां तक कह दिया कि यह लापरवाही से हुई मौत नहीं, बल्कि हत्या है। इसलिए सरकार अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ पुलिस केस दर्ज कराएगी।

    अस्पताल के खिलाफ आरोप हुए साबित अस्पताल पर महंगी दवाओं का इस्तेमाल करने, गैर कानूनी तरीके और लापरवाही से मामले को हैंडल करने तथा कागजों में गड़बड़ी करने के आरोप साबित हुए हैं। अस्पताल का लाइसेंस रद कराने के लिए एमसीआइ (मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया) और आइएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) को लिखा जाएगा।

    ऐसे बनाए अनाप-शनाप बिल-

    15 पेज के बिल में अस्पताल ने 14-15 दिन के उपचार में 660 सीरिंज और 2700 ग्लव्स का इस्तेमाल दिखाया है। आद्या को 25 बार प्लेटलेट्स चढ़ाई गई। आठ बार यह प्लेटलेट्स दो हजार रुपये प्रति यूनिट दी गई जो कानूनन 400 रुपये प्रति यूनिट होने चाहिए। मेरोपैनम इंजेक्शन 3112 रुपये के हिसाब से लगा, जबकि 400 रुपये वाला इंजेक्शन भी अस्पताल में मौजूद था।

    3.20 लाख रुपये की दवा के बदले छह लाख रुपये वसूले गए। इसी तरह आइसीयू के किराये में प्रतिदिन तीन हजार के बदले एक लाख रुपये वसूले गए। यह है मामला दिल्ली के द्वारका की रहने वाली आद्या सिंह को 27 अगस्त को तेज बुखार हुआ। उसके पिता जयंत सिंह ने उसे द्वारका के सेक्टर-12 स्थित रॉकलैंड अस्पताल में भर्ती कराया।

    31 अगस्त को जांच में उसे टाइप-4 का डेंगू मिला जिसके बाद डॉक्टरों ने उसे वहां से शिफ्ट करने की सलाह दी। उसी दिन आद्या को गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती करा दिया गया। फोर्टिस में पहले ही दिन से आद्या को वेंटीलेटर पर रखा गया। हालत सुधरती न देख परिजनों ने दबाव बनाया तो फोर्टिस अस्पताल ने 14 सितंबर को उसे फिर से रॉकलैंड में शिफ्ट करते हुए बिना उपकरणों वाली एंबुलेंस में भेज दिया।

    इस वजह से उसकी मौत हो गई। शायद यह मामला दबा ही रह जाता, लेकिन विवाद उस समय शुरू हुआ जब मौत के बाद फोर्टिस ने जयंत सिंह को 15 लाख 59 हजार रुपये का बिल थमा दिया। जयंत ने ट्विटर के जरिये केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को इसकी जानकारी।

    सोशल मीडिया पर जब बहस छिड़ी तो नड्डा ने जांच के आदेश दिए। वहीं, प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने भी तीन वरिष्ठ डॉक्टरों की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित कर दी। 12 दिसंबर को हाई कोर्ट में जाएगी रिपोर्ट हाई कोर्ट ने इस मामले में जांच रिपोर्ट तलब की हुई है। 12 दिसंबर को सरकार यह रिपोर्ट कोर्ट में जमा कराएगी।

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