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    पुराने नोट जमा कराने के लिए और मौका देने से सरकार का इन्कार

    Published: Mon, 17 Jul 2017 10:54 PM (IST) | Updated: Tue, 18 Jul 2017 09:27 AM (IST)
    By: Editorial Team
    ol note 17 07 2017

    नई दिल्ली। पांच सौ और हजार के पुराने नोट जमा कराने के लिए एक मौका और देने से केंद्र सरकार ने साफ इन्कार कर दिया है।

    सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को दायर हलफनामे में कहा है कि पुराने नोट जमा कराने के लिए और मौका नहीं दिया जा सकता ऐसा करने से नोटबंदी और कालेधन को खत्म करने का उद्देश्य विफल हो जाएगा।

    सुप्रीम कोर्ट से पुराने नोट जमा कराने की गुहार लगाते हुए दायर याचिकाओं के जवाब में सरकार ने 65 पृष्ठों का ताजा हलफनामा दायर किया है।

    पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने सरकार से पूछा था कि क्या वह लोगों को पुराने नोट जमा कराने के लिए एक और मौका दे सकती है।

    विचार कर सरकार कोर्ट को बताए। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में यह भी कहा था कि अगर कोई व्यक्ति उस दौरान बीमार हो गया और नोट नहीं जमा करा पाया तो उसे उसकी वैध रकम जमा कराने से कैसे रोका जा सकता है।

    सरकार ने दो टूक शब्दों में कहा है कि उसने बहुत सोच समझ कर निर्णय लिया है कि अब कोई और मौका देने की जरूरत नहीं है। न ही सरकार को इसके लिए कानून की धारा 4(1)(2) की शक्ति का इस्तेमाल करने की जरूरत है।

    सरकार ने कहा है कि गत वर्ष आठ नवंबर की अधिसूचना में व्यक्ति को स्वयं अथवा किसी अधिकृत एजेंट या व्यक्ति के जरिए पुराने नोट जमा कराने की छूट दी गई थी।

    याचियों ने अपनी याचिकाओं में इस बात का कोई तर्कसंगत कारण नहीं बताया है कि वे स्वयं या उनके द्वारा अधिकृत व्यक्ति 500 और 1000 के पुराने नोट क्यों नहीं जमा करा पाया।

    सरकार ने कहा है कि नोटबंदी के दौरान लोगों को नौ नवंबर से लेकर 30 दिसंबर तक 51 दिन का समय पुराने नोट जमा कराने के लिए दिया गया था। नोट जमा कराने की यह एक लंबी अवधि थी।

    जबकि 1978 में हुई नोटबंदी के दौरान पुराने नोट जमा कराने के लिए सिर्फ छह दिन का समय दिया गया था। सरकार ने अपने हलफनामें में 1978 की नोटबंदी और इस बार की नोटबंदी की तुलना भी की है।

    सरकार ने कहा है कि नोटबंदी के दौरान विभिन्न एजेंसियों के जरिये बड़े पैमाने पर गैरकानूनी गतिविधियों और घपले की सूचनाएं सरकार को मिलीं। लोगों ने सुविधा का दुरुपयोग किया। पुराने नोटों से सोना खरीदा गया।

    पैट्रोल पंपों पर भी दुरुपयोग हुआ। विभिन्न सरकारी एजेंसियों और आयकर विभाग के छापों में बड़ी मात्रा में नकदी बरामद हुई। इन गैरकानूनी गतिविधियों को तत्काल रोकना जरूरी था।

    सारी परिस्थितियों पर विचार कर 31 दिसंबर से पुराने नोट जमा कराने पर रोक लगाने का अध्यादेश लाया गया। अध्यादेश आरबीआई के सभी आदेशों और आठ नवंबर की अधिसूचना से ऊपर था।

    यह अध्यादेश बाद में कानून बन गया है और 28 फरवरी से कानून गजट भी हो चुका है। संसद से कानून बनने के बाद याची किसी अधिकार का दावा नहीं कर सकते।

    सरकार ने हलफनामे में छापों के दौरान बरामद की गई नकदी, दर्ज किए गए मामलों आदि का भी ब्योरा दिया है।

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