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    इस साल पहली बार खुले हसनम्बा देवी मंदिर के द्वार

    Published: Fri, 13 Oct 2017 04:17 PM (IST) | Updated: Fri, 13 Oct 2017 04:21 PM (IST)
    By: Editorial Team
    hasanaba devi1 13 10 2017

    हसन। इस साल पहली बार हसनम्बा देवी मंदिर के दरवाजे उनके भक्तों के विए खोल दिए गए। चूंकि यह कुछ दिनों के लिए ही खुले रहेंगे इसलिए इसके पूरे साल फिर बंद होने के पहले भक्तजन दर्शन के लिए उमड़ पड़ते हैं।

    मान्यता है कि हसनम्बा देवी वास्तव में एक मुस्लिम महिला हसन बी है जो कि देवी बन गई। हसन जिले के इस ऐतिहासिक व धार्मिक स्थल पर किताब 'ग्राम पूर्ण' में डॉ. दयावानुर मंजूनाथ का कहना है कि कर्नाटक और हसन गैजेटेर के शिलालेख में हसन बी के बारे में बताया है कि इस नाम की महिला कथित तौर पर उसकी सास के अत्याचार से परेशान थी। उसने मंदिर में प्रवेश किया और खुद को अंदर बंद कर दिया।

    कहा जाता है कि एक साल बाद जब मंदिर का दरवाजा खुला तो उसके चारों ओर एक तेल की दीपक जल रही थी। समय बीत जाने के बाद, उसका नाम पहले हसनबी से वर्तमान के हसनम्बे में तब्दील हो गया।

    पेंशन मोहल्ला में एक मुस्लिम परिवार का कहना है कि मुस्लिम भी मानते हैं कि हसनम्बा, हसन बी है और इस मंदिर में उनके दर्शन के लिए लाइन लगती है।

    लेकिन स्थानीय पौराणिक कथाओं में यह कहा गया है कि सप्त मटूकेस-वैष्णवी, इंद्राणी, माहेश्वरी, कुमारी, ब्रह्मी देवी, वराही और चामुंडी, जो वाराणसी से दक्षिण में यात्रा कर रहे थे, हसन की खूबसूरती से प्रभावित हुए और वहां रहने का फैसला किया।

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