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    जब राकेश शर्मा अंतरिक्ष में पहुंचे तो लोगों ने कहा था- ये क्या पाप कर दिया?

    Published: Thu, 16 Feb 2017 09:17 AM (IST) | Updated: Thu, 16 Feb 2017 09:28 AM (IST)
    By: Editorial Team
    isro rakesh sharma 16 02 2017

    नई दिल्ली। आज जब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अंतरिक्ष में एक साथ 104 उपग्रह भेजकर इतिहास रचा है और दुनिया को चमत्कृत कर दिया है, तब याद आता है कि अंतरिक्ष में जाने के भारत के शुरुआती कदमों को कितनी दिक्कतें उठाना पड़ी थीं।

    अंतरिक्ष में भारत का पहला कदम राकेश शर्मा को तत्कालीन सोवियत रूस भेजने के रूप में था। तब भारत की अंतरिक्ष अनुसंधान क्षमता इतनी नहीं थी कि वो अपना कोई यात्री अंतरिक्ष में भेज सके, लेकिन हमारी बुद्धिमत्ता का लोहा दुनिया मानती थी।

    यही वजह थी कि सोवियत रूस ने तब भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सामने दो भारतीयों को अपने मिशन में शामिल करने का प्रस्ताव रखा।

    इंदिरा गांधी के पास तब वायुसेना के अफसरों के अलावा कोई विकल्प नहीं था। अंतत: वायुसेना के दो सबसे काबिल अफसरों राकेश शर्मा और रवीश मल्होत्रा का चयन हुआ।

    इन्हें 18 महीने की लंबी और कड़ी ट्रेनिंग दी गई। ट्रेनिंग के बाद जब राकेश शर्मा अंतरिक्ष पहुंचे तो भारत में एक अजब ही अनिश्चय का माहौल पसर गया।

    अधिकांश आबादी यह भरोसा करने को तैयार नहीं थी कि कोई इंसान अंतरिक्ष में भी जा सकता है। उस समय के अखबारों में अंतरिक्ष यात्रा से जुड़ी कई रोचक और अंधविश्वास से भरी खबरें छप रही थीं।

    एक स्थानीय अखबार में छपी खबर के मुताबिक 'भारत की इस उपलब्धि पर यूं तो पूरे देश में खुशी का माहौल था, लेकिन ग्रामीण इलाकों में लोग इसे अपशकुन की तरह देख रहे थे"।

    एक गांव के धार्मिक नेता इससे काफी गुस्सा हो गए और उन्होंने कहा कि 'पवित्र ग्रहों पर कदम रखना धर्म का अपमान करना है। राकेश शर्मा ने ऐसा करके पाप किया है"।

    यह खबर उस दौर में भी खूब चर्चित हुई और अंतरिक्ष में शर्मा के जाने से खुश और नाखुश लोग दो धड़ों में बंट गए। दरअसल, तब भारत में अंधविश्वास काफी गहरा था और लोग ऐसी बातों पर सहज ही विश्वास कर लेते थे।

    उस समय की एक बात और बड़ी मशहूर हुई कि अंतरिक्ष स्टेशन से जब राकेश शर्मा ने इंदिरा गांधी को फोन किया तो भारतीय प्रधानमंत्री ने पूछा कि वहां से हमारा हिंदुस्तान कैसा नजर आता है।

    इसके जवाब में शर्मा ने कहा- 'सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा"। सन् 1984 में 3 अप्रैल से 11 अप्रैल तक की उस यात्रा के बाद तो राकेश शर्मा इतिहास और सामान्य ज्ञान की किताबों में हमेशा के लिए दर्ज हो गए।

    उस घटना के साथ भारत अंतरिक्ष की ओर कदम बढ़ा चुका था।

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