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    कभी लाखों रुपए कमाने वाले तलवार दंपती को जेल में मिलते थे केवल 80 रुपये

    Published: Thu, 12 Oct 2017 10:05 PM (IST) | Updated: Thu, 12 Oct 2017 10:24 PM (IST)
    By: Editorial Team
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    गाजियाबाद। बेटी आरुषि की हत्या के आरोप में भले ही तलवार दंपती को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरी कर दिया हो, मगर उससे पहले डॉक्टर नूपुर और राजेश तलवार गाजियाबाद की डासना जेल में उम्र कैद की सजा काट रहे थे। इस दौरान डॉक्टर राजेश तलवार के साथ ही नूपुर को नई पहचान और पता मिला था।

    जहां राजेश तलवार का कैदी नंबर 9342 था, वहीं नूपुर डासना जेल बैरक 14 में थीं और उनका कैदी नंबर 9343 था। हालांकि हाई कोर्ट से बरी होने के बाद दोनों का नाम बदलकर वापस डॉ. राजेश व डॉ. नूपुर हो गया।

    जेल में बच्चों को पढ़ाती थीं नूपुर-

    जेल में डॉ. नूपुर महिला बंदियों व उनके बच्चों को पढ़ाती थीं और हर शनिवार को महिला बंदियों के दांतों का चेकअप करती थीं। डॉ. राजेश जेल में दंत चिकित्सा का क्लीनिक चलाते थे। इस काम के लिए दोनों को 40-40 रुपये के हिसाब से प्रतिदिन का वेतन मिलता था।

    जेल प्रशासन ने बताया कि जेल में आने से पहले ही डॉ. राजेश तलवार को अस्थमा की परेशानी हो गई थी, इसीलिए उनकी बैरक बदलकर उन्हें जेल अस्पताल में जगह दी गई थी। पति-पत्नी सप्ताह में एक बार शनिवार को पार्क में डेढ़ घंटे के लिए मिलते थे।

    डॉ. नूपुर तलवार ने जेल में रहकर कविताएं भी लिखीं। सामाजिक कार्यकर्ता व पत्रकार वर्तिका नंदा द्वारा डासना जेल पर लिखी गई किताब 'तिनका तिनका तिहाड़' में भी नूपुर की कविताएं प्रकाशित हुई हैं।

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