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    लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे से लगी जमीनों के सौदों की जांच

    Published: Fri, 21 Apr 2017 06:36 PM (IST) | Updated: Fri, 21 Apr 2017 06:47 PM (IST)
    By: Editorial Team
    lucknow agra expressway 21 04 2017

    लखनऊ। उप्र के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की महत्वाकांक्षी परियोजना-लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे उद्घाटन के चार माह में ही शक के घेरे में आ गई है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने उससे जुड़ी जमीनों की खरीद-फरोख्त के जांच के आदेश दिए हैं।

    सूत्रों के अनुसार, प्रोजेक्ट से जुड़े 10 जिलों के कलेक्टरों को इस सड़क से जुड़े 230 गांवों की जमीनों के पिछले 18 माह में हुए सौदों की जांच करने को कहा गया है। ज्यादा मुआवजे का घोटालाइस जांच का मुख्य उद्देश्य एक्सप्रेसवे से जुड़ी खेती की जमीनों का उपयोग आवासीय कर ऊंचा मुआवजा प्राप्त करने में घोटाले का पता लगाना है।

    योगी सरकार ने एक सरकारी कंपनी "आरआईटीईएस" को एक्सप्रेसवे का एक माह में तकनीकी सर्वे करने के लिए नियुक्त किया है। यह कदम उप्र एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रीयल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीईआईडीए) के फील्ड अफसर वाईएन लाल द्वारा फीरोजाबाद में पांच चकबंदी अफसरों व 22 किसानों के खिलाफ एफआईआर कराने के बाद उठाया गया है।

    इन पर आरोप है कि इन्होंने बछेला-बछेली गांव में अपनी जमीनों को आवासीय उपयोग की बताया। इसका मकसद खेती की जमीन का आवासीय बताकर ज्यादा मुआवजा हड़पना था।

    कितनी जमीन खरीदी गई

    - 15,000 करोड़ रुपए है परियोजना की लागत।

    -3500 हैक्टेयर जमीन लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे के लिए खरीदी गई।

    - 232 गांवों की यह जमीन 10 जिलों में आती है।

    - 20,456 किसानों से यूपीईआईडीए ने यह जमीन खरीदी।

    - 670 करोड़ रुपए प्रोजेक्ट अब भी बिना उपयोग के पड़े हैं।

    - 99.5 फीसदी जमीन खरीदी जा चुकी है।

    इन जिलों से जुड़ा है प्रोजेक्ट

    इटावा, फीरोजाबाद, मणिपुर, उन्नाव, कानपुर, कन्नौज, ओरैया व हरदोई। उन्नाव के समीप इस पर एक हवाई पट्टी बनाई गई है, जहां लड़ाकू विमान उतारे जा सकते हैं। यह इसकी खासियत है। अखिलेश सरकार ने इस पर प्रायोगिक रूप से विमान उतरवाए थे।

    सभी कलेक्टरों को भेजे पत्र

    एक्सप्रेसवे अथॉरिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अवनीश अवस्थी ने बताया कि उन्होंने संबंधित जिला कलेक्टरों को जांच का पत्र 19 अप्रैल को भेज दिया है।

    जांच का उद्देश्य वास्तविक किसानों का नुकसान न हो यह सुनिश्चित करना है। कलेक्टरों से कहा गया है कि वे उनके पास पड़ा प्रोजेक्ट का पैसा लौटाए, जबकि अथॉरिटी के पास पैसा रिजर्व रहेगा।

    अखिलेश का ड्रीम प्रोजेक्ट

    उप्र की पिछली सपा सरकार ने दावा किया था कि 302 किमी लंबा यह एक्सप्रेसवे रिकॉर्ड टाइम में बनकर तैयार हुआ है। तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव इसे अपने ड्रीम प्रोजेक्ट बताते थे। चुनाव में उन्होंने इसे खूब भुनाने की कोशिश की, लेकिन विफल रहे।

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