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    प्रसून जोशी ने ट्रेन में बैठे-बैठे लिखा था- 'ठंडा मतलब कोका कोला'

    Published: Sat, 12 Aug 2017 07:37 AM (IST) | Updated: Sat, 12 Aug 2017 07:40 AM (IST)
    By: Editorial Team
    joshi 12 08 2017

    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने विवादों में घिरे रहे निर्माता-निर्देशक पहलाज निहलानी के स्थान पर गीतकार एवं कवि प्रसून जोशी (45) को सेंसर बोर्ड का चेयरमैन बनाया है। तीन साल या अगले आदेश तक के लिए की गई उनकी नियुक्ति तत्काल प्रभावी हो गई है। 2015 में पद्मश्री से सम्मानित प्रसून जोशी को दो बार सर्वश्रेष्ठ गीतकार का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला है। यही नहीं, स्वच्छ भारत मिशन का थीम सांग उन्होंने ही लिखा है। प्रसून की सफलता की कहानी काफी रोचक है।

    विज्ञापन में नाम

    एक बार हापुड़ स्टेशन पर प्रसून अपने ऐसी कंपार्टमेंट में ट्रेन चलने का इंतजार कर रहे थे। बाहर काफी गर्मी थी। ट्रेन चली तो उन्होंने प्लेटफॉर्म पर एक कुली को बोरों की थप्पी की छांव में नींद लेते देखा। कुछ दिन बाद कोका कोला का विज्ञापन आया जिससें फुटपाथ पर एक व्यक्ति कोक की बोतलों की थप्पी की छांव में सुस्ता रहा है विज्ञापन था ठंडा मतलब कोका कोला।

    यह प्रसून का बनाया विज्ञापन था जिसे कांस में 2003 में इस विज्ञापन को गोल्डल लायन पुरस्कार मिला। नौकरी ऐसे मिली एमबीए करने के बाद कंपनी ओगिल्वे एंड मेथर (ओएंड एम) के क्रिएटिव हेड से प्रसून मिले। उन्होंने सेरा टाइल्स की एक फोटो देते हुए दो घंटे में उन्हें इस पर विस्तार से लिखने को कहा। प्रसून ने 10 मिनट में लिखकर कॉपी दे दी। क्रिएटिव हेड ने उनसे कहा तुम्हें नौकरी मिल गई है।

    कॉपी में प्रसून ने हिंदी में दो लाइन लिखी थी- इस टाइल्स को खरीदने के लिए आपको वास्तव में अमीर होना होगा। कल्पना में अमीर।

    17 साल की उम्र में लिख दी थी पहली किताब

    16 सितम्बर 1971 को उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के दन्या गांव में जन्मे प्रसून के पिता सरकारी अधिकारी थे। मां लेक्चरर। माता-पिता का संगीत के प्रति रुझान था। -प्रसून का बचपन से ही लिखने पढ़ने के प्रति झुकाव था। बचपन में वे अपनी हस्तलिखित पत्रिका निकालते थे। 17 साल की उम्र में उन्होंने किताब "मै और वो" लिख दी थी।

    इसके बाद दो और किताबे लिखीं। उन्होंने शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ली है। उनके उस्ताद हफीज अहमद खान उन्हें ठुमरी गायक बनाना चाहते थे।-प्रसून ने एमबीए करने के बाद ओ एंड एम (ओगिल्वे ऐंड मेथर) के साथ जुड़े। यहां दस साल गुजारने के बाद वह मैकेन एरिक्सन से जुड़े। फिल्मी गीतकार वह अच्छे हिन्दी कवि, लेखक, पटकथा लेखक और गीतकार हैं। उनके कुछ विज्ञापनों के पंच ने उन्हें काफी नाम दिलाया। लज्जा से फिल्म के गीत से फिल्म जगत में जगह बनाने में कामयाब हुए। अन्तर्राष्ट्रीय विज्ञापन कंपनी "मैकेन इरिक्सन" में कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं।

    पुरस्कार

    फिल्म "तारे जमीं पर" के गाने "अंधेरे से डरता हूं मैं मां" (2007) और चटागांग (2014) के लिए उन्हें दो बार सर्वश्रेष्ठ गीतकार का "राष्ट्रीय पुरस्कार" भी मिला है। प्रसून को 2015 में पद्मश्री से नवाजा गया।2010 के राष्ट्रमंडल खेलों की विज्ञापन समिति में थे। विज्ञापन जगत में उन्हें 200 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अवार्ड मिल चुके हैं। इनसे मिली प्रसिद्धी फिल्म रंग दे बसंती,तारे जमीं पर,हम तुम,फना, ब्लैक, दिल्ली6 जैसी फिल्मों के गीत संवाद और पटकथा उन्होंने लिखी।

    कई प्रसिद्ध विज्ञापनों की पंच लाइन उन्हीं की लिखी हुई हैं। बार्बर शॉप-ए जा बाल कटाले पंच लाइन प्रसून ने ही लिखी। एड गुरू पीयूष पांडे को प्रसून अपना गुरू मानते हैं। पसंद प्रसून को ऐसे बोल वाले गीत नहीं भाते, जो अटपटे हों। ऐसे गीत और उसकी धुन सुनकर उनका खून खौल उठता है। "हवन करेंगे", "मस्ती की पाठशाला" और "गेंदा फूल" जैसे गीत उन्हें पसंद आते हैं।

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