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    एक फैसले ने बर्फीली सर्दियों में भी पाकिस्तान से दिला दी जीत

    Published: Fri, 13 Oct 2017 08:21 AM (IST) | Updated: Fri, 13 Oct 2017 08:22 AM (IST)
    By: Editorial Team
    thimayya 13 10 2017

    केएस थिमैय्या! यही नाम था भारत के उस जांबाज सैन्य अधिकारी का, जिनके साहस भरे एक फैसले के कारण भारत ने पाकिस्तान को जबरदस्त पटखनी दी थी। किस्सा कुछ यूं है कि 1947 में भारत के बंटवारे के बाद भी कश्मीर का मसला अनसुलझा था।

    कश्मीर पर कब्जे के लिए पाकिस्तान ने कबीलाई हमलावर और अपने सैनिक भेज दिए। इससे घबराए कश्मीर के महाराजा हरिसिंह ने भारत में विलय पर तुरंत हस्ताक्षर कर दिए। हस्ताक्षर होते ही भारत ने फौरन अपने सैनिकों को विमान से श्रीनगर भेजना शुरू किया। पाकिस्तानी

    हमलावर हवाई अड्‌डे के बिलकुल नजदीक पहुंच गए थे, लेकिन ऐन वक्त पर पहुंचकर भारतीय सेना ने उन्हें खदेड़ दिया। इसी के साथ दोनों देशों में जंग छिड़ गई। पाक सेना ऊंचाई पर होने से मजबूत स्थिति में थी, जबकि भारतीय सेना निचले इलाके में होने से उनके सीधे निशाने पर थी।

    ऐसे में टैंकों को बर्फीली पहाड़ियों के ऊपर ले जाने पर ही स्थिति भारत के पक्ष में हो सकती थी। जांबाज अफसर थिमैय्या ने यह साहसिक फैसला लिया और अपनी टुकड़ी के साथ टैंकों को 11,575 फीट ऊंची बर्फीली पहाड़ियों में स्थित जोजिला दर्रा तक ले गए। वहां टैंकों से ऐसी गोलाबारी की कि पाकिस्तानी भाग खड़े हुए। थिमैय्या के उस एक फैसले से लड़ाई लंबी खिंचने के बजाय जल्दी समाप्त हुई और कश्मीर का वर्तमान हिस्सा भारत के पास बच गया।

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