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    रामजन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य रामविलासदास ने कहा, मैंने ही तोड़ा था ढांचा

    Published: Fri, 21 Apr 2017 08:02 PM (IST) | Updated: Fri, 21 Apr 2017 08:08 PM (IST)
    By: Editorial Team
    vedaanti 21 04 2017

    अयोध्या। रामजन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य, पूर्व सांसद व मंदिर आंदोलन के अग्रणी नेता डॉ. रामविलासदास वेदांती ने दावा किया कि छह दिसंबर, 1992 को विवादित ढांचा उन्होंने ही तोड़ा और तोड़वाया था। इसके लिए यदि कोर्ट फांसी की सजा दे तो वह फंदे पर लटकने को तैयार हैं।

    कहा कि मैं रामलला से यह प्रार्थना जरूर करूंगा कि भारत सरकार और प्रदेश सरकार को ऐसी दिशा मिले कि रामजन्मभूमि पर जल्द से जल्द मंदिर का निर्माण हो।

    वह नयाघाट स्थित अपने आवास हिदूधाम में मीडिया से मुखातिब थे। डॉ. वेदांती ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी समेत 13 नेताओं के खिलाफ ध्वंस की साजिश रचने का मामला चलाए जाने की सीबीआइ को इजाजत दी गई है।

    उन्होंने छह दिसंबर 1992 के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि जब कारसेवक ढांचा तोड़ रहे थे, उस समय विहिप नेता अशोक सिहल, महंत अवेद्यनाथ व मैं नारे लगवा रहा था, "ढांचा जल्दी तोड़ो, जब तक यह नहीं टूटेगा मंदिर निर्माण नहीं होगा।"

    जबकि, ढांचा से कुछ ही दूर स्थित मंच से आडवाणी, जोशी आदि नेता कारसेवकों से ढांचे से दूर हटने का अनुरोध कर रहे थे।

    डॉ. वेदांती ने सुप्रीम कोर्ट के जजों को चुनौती दी कि ध्वंस के समय के साक्ष्यों का अयोध्या आकर पुनरावलोकन करें। डॉ. वेदांती ने सीबीआइ की नीयत पर भी सवाल खड़ा किया और कहा कि सीबीआइ की झूठी गवाही पर जजों ने फिर मुकदमा चलाने का आदेश दिया है।

    उन्होंने सरकार से विवादित स्थल के इर्द-गिर्द अधिग्रहीत 67.77 एकड़ जमीन रामजन्मभूमि न्यास को सौंपने की भी मांग की, ताकि इस भूमि पर राममंदिर निर्माण शुरू किया जा सके।

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