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    हिंदी का अपमान : कर्मचारी ने डस्टबिन में फेंका हिंदी में लिखा आवेदन

    Published: Thu, 14 Sep 2017 08:43 PM (IST) | Updated: Fri, 15 Sep 2017 07:00 AM (IST)
    By: Editorial Team
    hindi bhopal image 14 09 2017

    सुभाष चंद्र, श्री मुक्तसर साहिब। देश भर में गुरुवार को हिंदी दिवस मनाया गया। वहीं पंजाब के श्री मुक्तसर साहिब में पंजाब एंड सिंध बैंक की शाखा में हिंदी का अपमान हुआ।

    बैंक कर्मचारियों ने हिंदी में लिखे एक महिला के आवेदन को स्वीकार करने से मना कर डस्टबिन में फेंक दिया। बैंककर्मियों के इस व्यवहार की शिकायत महिला ने पुलिस से कर दी। जिसके बाद बैंककर्मियों को अपनी गलती का एहसास हुआ।

    रोशनी रानी ने बताया कि माल गोदाम रोड स्थित पंजाब एंड सिंध बैंक की शाखा में उनका खाता है। गुरुवार दोपहर वह रुपये निकलावने के लिए बैंक गईं। उसने कर्मचारी को बताया कि उसकी पासबुक गुम हो गई। उसे दो हजार रुपये चाहिए।

    इस पर बैंक कर्मी ने उसे आवेदन लिखकर देने को कहा। उसने तुरंत बैंक मैनेजर को हिंदी में आवेदन लिखकर दे दिया। हिंदी में आवेदन देख बैंककर्मी भड़क गया और कहा कि 'इसे हिंदी में क्यों लिखा पंजाबी या अंग्रेजी में क्यों नहीं। हस्ताक्षर भी हिंदी में किए गए हैं।'

    रोशनी का कहना है कि उसने बैंक कर्मी से कहा कि वह अंग्रेजी में भी हस्ताक्षर कर देगी लेकिन उसने आवेदन को डस्टबिन में फेंक दिया और पंजाबी या अंग्रेजी में आवेदन लिखकर देने को कहा। वह बैंक मैनेजर के पास गईं लेकिन मैनेजर ने भी उसकी कोई बात नहीं सुनी।

    घर पहुंचकर उसने पति अशोक महिदरा को यह बात बताई। इसके बाद अशोक ने एसएसपी सुशील कुमार को बैंककर्मियों के इस व्यवहार की जानकारी दी जिसके बाद थाना सिटी से पुलिस टीम भी बैंक पहुंच गए।

    शिकायत मिली, की जा रही पड़ताल

    एसएचओ सिटी थाना प्रभारी तेजिदरपाल सिंह का कहना है कि रोशनी रानी की ओर से उसका हिंदी में लिखा आवेदन डस्टबिन में फेंककर अभद्र व्यवहार करने की शिकायत आई है। मामले की पड़ताल की जा रही है।

    आवेदन पर अंग्रेजी में नहीं थे हस्ताक्षर - मैनेजर

    बैंक मैनेजर नरेश गर्ग का कहना है कि कर्मचारी ने आवेदन पर हिंदी में हस्ताक्षर होने की बात कही थी चूंकि खाते में अंग्रेजी में दस्तखत हैं। इसके अलावा महिला को साथ में पहचान पत्र लाने को कहा गया था। हिंदी में आवेदन पर कोई कोई एतराज नहीं था।

    वहीं डीसी डॉ. सुमीत जारंगल का कहना है कि फिलहाल उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है। हैरानी है कि कोई कर्मचारी ऐसा कैसे कर सकता है।

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