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    सोमनाथ की तर्ज पर राम मंदिर निर्माण की उठी मांग, जानें इस ज्योतिर्लिंग के बनने की कहानी

    Published: Tue, 21 Mar 2017 10:04 AM (IST) | Updated: Tue, 21 Mar 2017 11:13 AM (IST)
    By: Editorial Team
    somnath temple 21 03 2017

    नई दिल्ली। वरिष्ठ भाजपा नेता उमा भारती ने कहा है कि सोमनाथ की तर्ज पर राम मंदिर का हल निकाला जाए। ऐसे में यह जानना रोचक होगा कि आखिर सोमनाथ मंदिर का निर्माण कैसे हुआ?

    विश्व हिंदू परिषद के नेता प्रवीण तोगड़िया की बार कह चुके हैं कि सोमनाथ मंदिर के निर्माण के लिए सरदार पटेल लोगों से बात नहीं करने गए और न ही उन्होंने अदालत के आदेश की प्रतीक्षा की, बल्कि उन्होंने संसद में एक प्रस्ताव लाकर मंदिर का निर्माण करा दिया था।

    इतिहासकारों के अनुसार, इस समय सोमनाथ में जो भव्य मंदिर खड़ा है, उसे भारत के गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने बनवाया था। एक दिसंबर 1995 को भारत के राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने इसे राष्ट्र को समर्पित किया।

    भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण में गहन सर्वे और खुदाई के बाद पाया कि मंदिर के संरचना में विभिन्न परतें थीं। यहां खुदाई में कई मूर्तियां और गोलाकार शिवलिंग भी मिला। इसके बाद मांग उठने लगी कि यहां नए मंदिर का निर्माण किया जाए और प्राचीन स्मारक का रख-रखाव किया जाए।

    तब सरदार पटेल ने कहा था कि हिंदू भावनाएं इस मंदिर को लेकर मजबूत हैं, बड़े पैमाने पर फैली हुई हैं। मौजूदा स्थिति में मंदिर के रख-रखाव से लोगों की भावनाओं को संतुष्ट नहीं किया जा सकता। अंत में उन्होंने तय किया कि मंदिर का निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए भारत सरकार और सौराष्ट्र सरकार ने 15 मार्च 1950 को मंजूरी दे दी थी।

    मगर, महात्मा गांधी का सुझाव था कि मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए सरकार कोई आर्थिक मदद नहीं देगी। इसके बाद में जनवरी 1949 में एक ट्रस्ट का गठन किया गया। सन् 1949 में करीब 25 लाख रुपए जमा किए गए और मंदिर का निर्माण शुरू किया गया। भारत सरकार ने 15 मार्च 1950 को मंदिर की नींव का पत्थर रखा और 8 मई 1950 को मंदिर निर्माण का काम शुरू करते हुए यहां नंदी को स्थापित किया गया।

    11 मई 1951 को तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद की मौजूदगी में लिंग स्थापना का समारोह किया गया। इस दौरान देभर से हजारों लोग वहां मौजूद थे। मंदिर का निर्माण चालुक्य शैली के आर्किटेक्चर में किया गया, जिसमें बलुवा पत्थर का इस्तेमाल किया गया।

    प्रस्तुतिः शशांक बाजपेई/अरविंद दुबे

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