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    पीएम के निर्देश पर राहत तेज, गुजरात से आई सुखड़ी

    Published: Thu, 25 Aug 2016 11:10 PM (IST) | Updated: Thu, 25 Aug 2016 11:13 PM (IST)
    By: Editorial Team
    modi 25 08 2016

    वाराणसी। गंगा सहित विभिन्न नदियों में आई बाढ़ को लेकर संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्री को पीएम ने केंद्र की ओर से हर संभव मदद का भरोसा तो दिया ही है, साथ ही अपने संसदीय क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत का जिम्मा एक तरह से खुद ही संभाल लिया है। बनारस में करीब सात लाख की आबादी गंगा और उसकी सहायक नदी वरुणा की बाढ़ के चपेट में हैं।

    पीएम के निर्देश पर गुजरात से राहत सामग्री की खेप भी यहां भेजी गई है। इंसानों के लिए जहां अन्य ढेरों सामान के साथ कई दिनों तक चलने वाली खाद्य सामग्री सुखड़ी भेजी गई हैं वहीं बेजुबानों के लिए शुक्रवार की सुबह गुजरात की बनास डेयरी से 25 हजार बोरी पशु चारा पहुंच जाएगा। राहत कार्यों की निगरानी का जिम्मा संभालने के लिए खुद प्रधानमंत्री ने अपने पीए तन्मय मेहता व सूरत के सांसद सीआर पाटिल को यहां भेजा है। इस संबंध में समय-समय पर अपडेट पीएमओ को दिया जा रहा है।


    चौबीसों घंटे कंट्रोल रूम

    पीएम के संसदीय कार्यालय में बाढ़ राहत शिविर चौबीसों घंटे कार्य कर रहा है। इसके लिए चार शिफ्ट में भाजपा के दो-दो पदाधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। बाढ़ प्रभावित लोगों तक सामान पहुंचाने के लिए एनडीआरएफ की टीम के साथ ही 500 भाजपा कार्यकर्ता लगाए गए हैं। 23 अगस्त से संचालित कंट्रोल रूम के नंबर पर हर दिन करीब 250 से 300 फोन प्रभावित लोगों के पहुंच रहे हैं जिनका फॉलोअप हो रहा है। इसके अलावा काफी संख्या में लोग पीएम के संसदीय कार्यालय पहुंचकर भी राहत सामग्री प्राप्त कर रहे हैं।


    मोमबत्ती से लेकर मच्छर भगाने का क्वायल तक

    पीएम के संसदीय दफ्तर से मुहैया कराई जाने वाली सामग्री में आलू, प्याज, सुखड़ी, ब्रेड, बटर, चाय की पत्ती, पाउडर का दूध, चीनी, लाई-चना, नमकीन, बिस्किट, मच्छर भगाने वाला क्वायल, माचिस, कंबल, पीने के पानी की बोतल, गैलेन व पाऊच, पके हुए भोजन का लंच पैकेट शामिल है। गुरुवार की शाम तक दस हजार लंच व सामग्री पैकेट, 50 हजार पानी की बोतल, एक लाख पानी का पाऊच आदि बांटे जा चुके थे। बांटी जा रही राहत सामग्री में गुजरात से आए सामानों के साथ ही स्थानीय स्तर पर पार्टी पदाधिकारियों व समर्थकों द्वारा दी जाने वाली सामग्री भी शामिल हैं।


    क्या है सुखड़ी

    गेहूं के आटे को भूनकर उसमें चीनी या गुड़ मिलाते हुए शुद्ध घी में गूंथा जाता है। बाद में उसे बर्फी के आकार में काट लेते हैं। सूखने पर इसे ही सुखड़ी कहा जाता है जिसे करीब पखवारे भर तक खाया जा सकता है। गुजरात से 250 ग्राम के दस हजार पैकेट यहां बांटने के लिए भेजा गया था। शुक्रवार को 2250 किग्रा सुखड़ी की खेप और पहुंच रही है।

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