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    केरल में राष्ट्रपति शासन के पक्ष में नहीं आरएसएस

    Published: Sun, 13 Aug 2017 12:00 AM (IST) | Updated: Sun, 13 Aug 2017 12:04 AM (IST)
    By: Editorial Team
    rss12 13 08 2017

    तिरुअनंतपुरम। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) केरल में राष्ट्रपति शासन लगाने के पक्ष में नहीं है। उसने राज्य में अपने स्वयंसेवकों की हत्या की जांच संवैधानिक संस्था से कराने की मांग की है। आरएसएस ने स्थिति पर नियंत्रण के लिए संवैधानिक दायरे में केंद्र के हस्तक्षेप और कार्रवाई की भी मांग की।

    आरएसएस के केरल प्रांत कार्यवाहक (प्रमुख) पी. गोपालन मास्टर कुट्टी ने शनिवार को कहा कि हम जनता की चुनी हुई सरकार को गिराने के खिलाफ हैं। ऐसा करना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि 1959 में केरल में जब अनुच्छेद 356 लागू किया गया तब आरएसएस के संस्थापक गुरु गोलवलकर ने उसका विरोध किया था।

    मास्टर कुट्टी ने कहा कि आरएसएस का मानना है कि राज्य में राजनीतिक हिंसा केवल राजनीतिक बदलाव के जरिये ही खत्म हो सकती है। ऐसा बातचीत के जरिये नहीं हो सकता क्योंकि पूर्व में इस तरह के प्रयास न केवल व्यर्थ गए बल्कि हालात और बिगड़ गए। आरएसएस नेता ने कहा कि भाजपा-आरएसएस को राजनीतिक तौर पर यहां मजबूत करने की जरूरत है। मास्टर कुट्टी दिल्ली से आए पत्रकारों के एक समूह को संबोधित कर रहे थे। पत्रकारों के समूह ने कण्णूर जैसे इलाकों का दौरा कर आरएसएस और माकपा कार्यकर्ताओं के हिंसक झड़पों का जायजा लिया। केरल आरएसएस प्रमुख ने कहा कि हम चाहते हैं केंद्र मामले की जांच के लिए कोई आयोग राज्य में भेजे जो मानवाधिकार आयोग या एससी/एसटी आयोग जैसा वैधानिक आयोग हो। या फिर केंद्रीय गृह मंत्री मुख्यमंत्री को बुलाकर राजनीतिक हत्याओं की रिपोर्ट मांगें।

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