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    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिले श्री श्री रविशंकर

    Published: Wed, 15 Nov 2017 09:54 AM (IST) | Updated: Wed, 15 Nov 2017 10:41 PM (IST)
    By: Editorial Team
    yogi sri sri 15 11 2017

    लखनऊ। "आर्ट आफ लिविंग" के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर ने अयोध्या विवाद हल करने की मुहिम तेज कर दी है। बुधवार सुबह राजधानी पहुंचे श्रीश्री ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सरकारी आवास पर जाकर उनसे राम मंदिर और अयोध्या विवाद के समाधान पर चर्चा की।

    योगी ने भी कहा, संवाद से यह विवाद हल हो सकता है। श्रीश्री गुरुवार को अयोध्या जाएंगे। हालांकि बाबरी एक्शन कमेटी के संयोजक जफरयाब जिलानी और पूर्व सांसद राम विलास वेदांती रविशंकर की पहल से पहले ही असहमति जता चुके हैं।

    इस पर श्रीश्री ने कहा है कि वार्ता से पहले किसी की मनाही समझ से परे है। श्रीश्री की कोशिश है कि अयोध्या में मंदिर और मस्जिद दोनों बन जाएं लेकिन, मंदिर आंदोलन से जुड़े संतों और नेताओं को इस पर एतराज है।

    योगी से मुलाकात में श्रीश्री ने अपना फार्मूला रखा। योगी उनके साथ करीब 35 मिनट तक रहे। हालांकि मुख्यमंत्री ने इसे शिष्टाचार भेंट बताया लेकिन, यह भी कहा कि "किसी भी विवाद के हल का सर्वश्रेष्ठ तरीका संवाद है। सर्वसम्मति से निकले हल में किसी पक्ष की हार-जीत नहीं होती।"


    मेरी मंशा रही है कि इस विवाद का हल संवाद से निकले। सरकार ऐसी किसी भी पहल का स्वागत करेगी। ऐसा नहीं हो सका तो हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले की प्रतीक्षा करेंगे। इसमें सरकार कोई पक्ष नहीं है, पर पक्षकार आपस में कोई समझौता कर सरकार से संपर्क करते हैं तो सरकार उनकी हर संभव मदद करेगी।

    -योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश

    बातचीत से करेंगे समाधान : श्री श्री

    श्रीश्री रवि शंकर ने कहा कि पक्षकारों से मिलकर बात की जाएगी और सभी की सहमति से राम मंदिर बनाया जाएगा। वह राजधानी में शिविर कार्यालय में राम जन्मभूमि मंदिर न्यास, अयोध्या के राष्ट्रीय महासचिव पंडित अमरनाथ मिश्र समेत अन्य लोगों के साथ बैठक करने पहुंचे थे।

    अमरनाथ मिश्रा ने कहा कि राम मंदिर का निर्माण वहीं होगा जहां रामलला विराजमान हैं। जहां तक मस्जिद का सवाल है, तो मुस्लिम धर्मगुरुओं से बात करके मस्जिद की जगह तय की जाएगी। हम यह नहीं चाहते कि कोर्ट में किसी भी पक्ष की हार-जीत हो। दोनों ही सूरत में हारेगा हिदुस्तान ही। रही बात शिया वक्फ बोर्ड की तो उनका दावा बेबुनियाद है।

    बाबर के नाम पर नहीं बनने देंगे मस्जिद : हिदू महासभा के अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि ने कहा कि मंदिर तो वहीं बनेगा जहां पर रामलला हैं। मस्जिद कहां बनेगी यह फैसला मुस्लिम समुदाय करेगा। इतना जरूर है कि जहां भी बनाई जाएगी, उसका नाम बाबर के नाम पर नहीं होगा।

    विहिप प्रवक्ता शरद शर्मा ने कहा है कि विवाद को लेकर किसी समझौते के शोर की कोई प्रासंगिकता नहीं है। पुरात्तव के सबूत हिंदुओं के पक्ष में हैं और कोर्ट सबूतों पर फैसला देती है। विहिप श्रीश्री का आदर करती है, लेकिन उन्हें पता होना चाहिए कि अतीत में ऐसे प्रयास विफल हो चुके हैं।


    खुद फैसला कर लिया तो बैठक क्यों : ऑल इंडिया अल इमाम वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष इमरान हसन सिद्दीकी श्रीश्री रविशंकर से नहीं मिल सके। जब वह पहुंचे तब तक श्रीश्री जा चुके थे। इमरान हसन ने बताया कि हम तो आपसी समझौते के लिए आए थे, लेकिन वहां मंदिर निर्माण के पक्षकारों ने पहले ही फैसला कर लिया है। विवादित जमीन पर ही मंदिर बनेगा, तो इस बैठक की क्या जरूरत थी।


    अभी कोई फॉर्मूला नहीं : आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के प्रतिनिधि गौतम विग ने कहा कि श्रीश्री हिंदू-मुस्लिम दोनों पक्षों को सुन रहे हैं। फिलहाल समाधान का कोई फॉर्मूला या प्रस्ताव तैयार नहीं है। दोनों पक्षों का रवैया बहुत सकारात्मक है। इस बीच भाजपा महासचिव राम माधव ने कहा है-"मुझे लगता है कि सुप्रीम कोर्ट में ये मामला चल रहा है और इसे चलने देना चाहिए।"


    मुस्लिम संगठनों को सुलह प्रयासों की कामयाबी पर संदेह

    मुस्लिम संगठनों को श्रीश्री के सुलह प्रयासों की कामयाबी पर संदेह है। इन संगठनों ने शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी के बयानों को भी खारिज करते हुए अनावश्यक बताया।

    मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना वली रेहमानी ने कहा कि 12 साल पहले भी श्रीश्री ने सुलह के प्रयास किए थे। नतीजे में कहा गया था कि विवादित स्थल हिंदुओं को सौंप दिया जाए। इस बार श्रीश्री का क्या फॉर्मूला है, पहले यह बताएं।


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