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    आधार से मोबाइल नंबर को लिंक करना पड़ा भारी, खाते से निकल गए 1.3 लाख रुपए

    Published: Fri, 13 Oct 2017 11:58 AM (IST) | Updated: Fri, 13 Oct 2017 01:18 PM (IST)
    By: Editorial Team
    shaswat 13 10 2017

    नई दिल्ली। पिछले साल नवंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की घोषणा के साथ ही डिजिटल बैंकिंग की दिशा में बढ़ने के लिए लोगों को बैंक में पैसे जमा करने और डिजिटल लेन-देन के लिए प्रेरित किया था। मगर, अभी भी हमारे बैंकिंग सिस्टम इतने सुरक्षित नहीं हैं कि वे जालसाजों से लोगों के पैसों को बचा सकें।

    सरकार ने जनता को अपने पैसे बैंकों में जमा करने के लिए मजबूर किया, लेकिन कड़ी मेहनत से जमा किए गए लोगों के पैसे वहां सुरक्षित नहीं हैं। हालिया मामला शाश्वत का सामने आया है, जिसे अपने मोबाइल नंबर को आधार से लिंक कराना भारी पड़ गया। इस कोशिश में उसके बैंक एकाउंट से 1.3 लाख रुपए लूट लिया गए।

    मुंबई के रहने वाले शाश्वत कोझिकोड की एक प्राइवेट फर्म में काम करते हैं। उन्हें एक फोन कॉल आया, जिसमें उनसे कहा गया कि वह एयरटेल के आधिकारिक नंबर 121 पर अपने सिम नंबर से एक एसएमएस करें। ऐसा करते ही उनके सिम की क्लोनिंग हो गई और जालसाज ने उनके खाते से 1.3 लाख रुपए निकाल लिए।

    इसके बाद शाश्वत ने अपनी आप बीती फेसबुक पर लिखी, जो वायरल हो गई। पढ़ें उसने क्या लिखा-

    दोस्तों! मैंने अपने आईसीआईसीआई बैंक के सैलरी एकाउंट से 1.3 लाख रुपए खो दिए हैं। एक जालसाज ने मुझे फोन किया और कहा कि वह एयरटेल से बोल रहा है। उसने मुझे अल्टीमेटम दिया कि मेरा आधार कार्ड फोन नंबर के साथ लिंक नहीं है। ऐसा नहीं करने पर मेरा एयरटेल नंबर बंद कर दिया जाएगा। उसने मुझे कहा कि मैं अपने सिम कार्ड से 121 नंबर पर मैसेज करे ताकि मेरा सिम चालू रहे।

    मुझे नहीं पता था कि धोखेबाज मेरे सिम को क्लोन करेगा और मेरी सारी मेहनत के पैसे लूट लेगा। वह मेरे उस निवेश (फिक्स्ड डिपॉजिट्स) को भी लूट लेगा, जिसे मैंने अपने जीवन के सबसे खराब समय के लिए बचाकर रखा था।

    क्या एक एसएमएस मेरे आईसीआईसीआई बैंक खाते में सेंध लगाने के लिए काफी था। क्या यह कमजोर तकनीक नहीं है, जिसके भरोसे हमें छोड़ दिया गया है। मैं इस धारणा से जी रहा था कि किसी व्यक्ति को मेरे खाते के विवरण या डेबिट कार्ड या कुछ संवेदनशील जानकारी की आवश्यकता होगी, जो सिर्फ मेरे पास ही होती है। मैंने हमेशा इसे बचाकर रखा।

    मगर, सच्चाई यह है कि सभी संवेदनशील सामग्री पहले से ही अपराधियों के पास है और वे वारदात के लिए इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। यह अविश्वसनीय है कि हमारे खातों से चोरी करना कितना आसान हो गया है।

    इसका सबसे दुखद पहलू यह है कि लूट के बाद शिकायत की गई और इसके बाद भी आईसीआईसीआई बैंक शेष राशि को बचाने में नाकाम रहा। घटना के बाद मैंने सर्विस रिक्वेस्ट (एस/आर 497438380) जनरेट करने के 18 घंटों के बाद और कस्टमर केयर और ब्रांच पर लगातार फॉलोअप करने के बाद भी बैंक मेरी शेष राशि को नहीं बचा सका। नतीजतन अगली सुबह जालसाज ने आसानी से बाकी रकम भी खाते से निकाल ली।

    प्रिय आईसीआईसीआई बैंक, क्या आपकी सेवाएं संकट के समय में खत्म हो जाती है या आप ग्राहकों की शिकायतों को दूर करने और आगे के नुकसान को रोकने के लिए भी कुछ करते हैं? आईसीआईसीआई बैंक को यह समझने की जरूरत है कि एक धोखेबाज अपनी गतिविधियों से एकाउंट के अलावा भी काफी कुछ तोड़ देता है। वह व्यक्कित के जीवन को भी तोड़ देता है।

    मुझे लगता है कि बैंक मेरे खाते को प्रभावी ढंग से सुरक्षित करने में असफल रहा है और मेरे नुकसान के लिए वह पूरी तरह से जिम्मेदार है। इसलिए आईसीआईसीआई बैंक को इस घटना में मेरे खोए एक-एक पैसे को लौटाना चाहिए।

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