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    जब क्रांतिकारियों ने पैसों से होली के रंग के बजाय खरीदे हथियार

    Published: Fri, 17 Mar 2017 08:34 AM (IST) | Updated: Fri, 17 Mar 2017 08:40 AM (IST)
    By: Editorial Team
    bhagat singh17 17 03 2017

    त्योहार का उल्लास किसे पसंद नहीं? मगर देश की आजादी की जंग के दौरान कुछ ऐसे वाकये भी हुए थे, जब क्रांतिकारियों ने त्योहार मनाने के बजाय हथियार खरीदने को प्राथमिकता दी। किस्सा उस दौर का है जब भारत में अंग्रेजों का शासन था। विदेशी आक्रांताओं के इस शासन को उखाड़ फेंकने के लिए वीर क्रांतिकारी भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, सुखदेव, राजगुरु व अन्य ने सिर पर कफन बांध रखा था।

    ये सब गुप्त जगहों पर बैठकें कर रणनीति बनाते और छापामार शैली में अंग्रेजों पर आक्रमण करते। आक्रमण के लिए इन्हें बंदूकें, गोलियां, बारूद आदि असलहे की जरूरत पड़ती थी। चूंकि भूमिगत होने के चलते इनके पास पैसा तो होता नहीं था, इसलिए ये लोगों से मिलने वाले पैसे से काम चलाते थे। एक बार ऐसा हुआ कि होली के त्योहार के ठीक एक दिन पहले एक छोटे हमले के लिए कुछ बारूद और गोलियां चाहिए थीं, किंतु पैसे बहुत कम थे।

    दूसरी ओर क्रांतिकारियों के मन में होली खेलने की इच्छा भी उठ रही थी। असमंजस था कि रंग खरीदें या बारूद! अंतत: आजाद बोले- 'देश की आजादी से बड़ा कोई उत्सव नहीं। जीवित रहे तो अनेक होलियां मनाएंगे"। सभी क्रांतिकारी तुरंत इस पर सहमत हुए और फिर रंग के बजाय बारुद और हथियार खरीदे गए।

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