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    बटाला के फाग उत्सव में बनती हैं जोड़ियां

    Published: Sun, 12 Feb 2017 07:22 AM (IST) | Updated: Sun, 12 Feb 2017 07:32 AM (IST)
    By: Editorial Team
    faag-utsav 12 02 2017

    पूजा गुप्ता, आनी। न कोई बैंड और न ही बारात। बटाला के फाग उत्सव में लड़की जिसे अपना वर चुनती है वही उसके जीवन का हमसफर बनता है। शादी साधारण तरीके से होती है। यहीं से लड़की पति के साथ उसके घर चली जाती है। लड़की ने जिसे अपना वर मान लिया, कोई उसकी अवहेलना नहीं कर सकता। लोग इसे भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद मानते हैं।

    इस उत्सव का आयोजन होली के एक दिन पहले होता है। इसे फाग उत्सव के नाम से जाना जाता है। बटाला गांव में यह सदियों से मनाया जा रहा है। भगवान श्रीकृष्ण के मंदिर में होने वाले उत्सव में अभी तक कई लोग मनपसंद जीवन साथी चुनकर परिणय सूत्र में बंधे हैं। आज भी वे सुखी जीवन व्यतीत कर रहे हैं। लोग सुखी जीवन को भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद मानते हैं। उनके चरणों में नतमस्तक हो इसका आभार जताते हैं।

    12 मार्च को होगा फाग उत्सव

    बटाला में भगवान श्रीकृष्ण के मंदिर में 12 मार्च को फाग उत्सव मनाया जाएगा। इस उत्सव में बाह्य सिराज के लोग हिस्सा लेते हैं। कुल्लू व शिमला जिले के अन्य इलाकों से भी लोग यहां आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं। फाग उत्सव के मौके पर आठवें पहर में मंदिर में विशेष पूजा शुरू होती है।

    मंदिर में भजन-कीर्तन का दौर शुरू होता है और भगवान श्रीकृष्ण को मंदिर से बाहर प्रांगण तक लाने के लिए लोग पारंपरिक भजन गाते हैं। इन भजनों को जति, नटाऊक भी कहते हैं। ब्रह्म मुहूर्त में भगवान श्रीकृष्ण लोगों को दर्शन देने के लिए देवालय से बाहर आते हैं और मंदिर परिसर में ढाई चक्कर काटकर फिर वापस देवालय में लौटते हैं। इस मौके पर कई युवक व युवतियां परिणय सूत्र में बंधने का फैसला लेते हैं।

    अब तक बन चुकी हैं कई जोड़ियां

    फाग उत्सव के मौके पर अब तक कई जोड़ियां बनी हैं। आज वे सुखी जीवन व्यतीत कर रहे हैं। मंदिर में फाग उत्सव में शादी रचाने वाले खुन्न गांव के रमेश चंद, कोहिला गांव के भागी राम, राम कृष्ण, जांऊ गांव के मोती लाल व लढागी के शिव दयाल का कहना है कि भगवान श्रीकृष्ण के आशीर्वाद से आज वे सुखी वैवाहिक जीवन व्यतीत कर रहे हैं। जीवन में कभी कोई कमी महसूस नहीं हुई और उनका सुखी परिवार है। श्रीकृष्ण मंदिर के कारदार रामानंद, पुजारी गोविद, मुकेश, खीमी राम, फतेह चंद, राजू राम, मंदिर के कठियाला बेली राम, चरण दास का कहना है कि इस मौके पर कई लोगों ने शादियां रचाई हैं।

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