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    16 दिनों बाद मिली 'गायब' पैसेंजर ट्रेन

    Published: Fri, 12 Sep 2014 10:31 AM (IST) | Updated: Fri, 12 Sep 2014 10:37 AM (IST)
    By: Editorial Team
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    नई दिल्ली। बिहार में बीते 16 दिनों से लापता गोरखपुर-मुजफ्फरपुर पैसेंजर ट्रेन आखि‍रकार गुरुवार को मिल गई। रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मालगाड़ी के पटरी से उतर जाने के बाद कई रेलगाड़ियों का मार्ग बदल दिया गया था, इसी दौरान 25 अगस्त की रात यह सवारी गाड़ी हाजीपुर से लापता हो गई थी।

    यह ट्रेन अजीबोगरीब ढंग से गायब हो गई थी और रेलवे को इसका कोई सुराग नहीं मिल पा रहा थी। जानकारी के अनुसार, आखिरी बार इसे बिहार के हाजीपुर स्टेशन पर देखा गया था। इसके बाद यह कहां गई इस बारे में न पूर्वोत्तर रेलवे को कुछ पता था और न ही पूर्व-मध्य रेलवे को। यह ट्रेन गोरखपुर-मुजफ्फरपुर पैसेंजर ट्रेन थी।

    रेलवे सूत्रों के मुताबिक 25 अगस्त की रात गोरखपुर-नरकटियागंज रेलमार्ग पर घुघली स्टेशन के पास एक मालगाड़ी के 9 डिब्बे पटरी से उतरने से इस मार्ग की सभी ट्रेनों को देवरिया, छपरा और वाराणसी रेलमार्ग से होकर चलाया गया था। गायब हुई गोरखपुर-मुजफ्फरपुर पैसेंजर ट्रेन भी इसी परिवर्तित मार्ग से ही गई थी लेकिन इंटरलॉकिंग की वजह से यह मार्ग भी बंद हो गया। इससे ट्रेन को हाजीपुर में ही रद्द करना पड़ गया।

    ट्रेन गायब होने की पहली घटना

    इस बीच हाजीपुर में ट्रेन की बोगियां खड़ी कर दी गई। तकरीबन चार दिन बाद जब सभी मार्ग सामान्य हुए तो इस पैसेंजर ट्रेन को फिर से चलाने का फैसला किया गया, लेकिन रेलवे अधिकारियों के तब होश उड़ गए जब उन्हें पता लगा कि ट्रेन तो हाजीपुर में है ही नहीं। अब रेलवे के अफसर ढूंढ़-ढूंढ़ कर परेशान थे लेकिन ट्रेन का पता नहीं लग रहा था। यह भारतीय रेलवे के इतिहास में ऐसी पहली घटना होगी जब कोई ट्रेन 16 दिनों से लापता रही जिसका कोई अता-पता नहीं चल पाया। हालांकि, किसी तरह 10 बोगियों की व्यवस्था कर पैसेंजर ट्रेन बहाल कर दी गई है, लेकिन गायब हुई ट्रेन का कुछ पता नहीं चल पाया था।

    भेजी गई थी गोरखपुर यार्ड

    खबर है कि समस्तीपुर मंडल की एक पैसेंजर ट्रेन रैक मरम्मत के लिए गोरखपुर यार्ड भेजी गई थी। यहां से वह ठीक कर समय से लौटाई नहीं गई। इस बीच जब गोरखपुर-मुजफ्फरपुर पैसेंजर ट्रेन की रैक हाजीपुर पहुंची तो वहां के कर्मचारियों को लगा कि हमारी रैक लौट आई है। इसके बाद संभवत: उस रैक को किसी और मार्ग पर भेज दिया गया, लेकिन कर्मचारियों ने पूर्वोत्तर रेलवे से संपर्क कर यह जानने का प्रयास नहीं किया कि यह वही रैक है या नहीं। इसी तरह की चूक पूर्वोत्तर रेलवे ने भी की। उसने हाजीपुर से ट्रेन न लौटने पर समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की।

    ऐसे होती है मॉनिटरिंग

    देश भर में ट्रेनों के एक-एक कोच और इंजन की मॉनिटरिंग के लिए कोचिंग ऑपरेशन इंफर्मेशन सिस्टम (सीओआईएस) का उपयोग किया जाता है। इस सिस्टम पर आरंभिक स्टेशन से ट्रेन चलने से पहले ही हर कोच का नंबर व गाड़ी के कुल डिब्बों की फीडिंग की जाती है। इसी आधार पर ट्रेनों के चार्ट में कोच नंबर फीड किए जाते हैं। इसके बाद रास्ते के हर स्टेशन पर सीओआईएस के मॉनिटर पर ट्रेन की हर जानकारी मिलाई जाती है। साल में एक बार रेलवे अपनी सभी बोगियों की गणना कराता है। किसी एक दिन के कुछ घंटे के भीतर एक साथ रेलवे के हजारों कर्मचारी रेलवे की बोगियों की गणना करते हैं।

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    • virendar12 Sep 2014, 05:34:43 PM

      wrong railway dipartment thik nahi hai driber se contect rakhna cahiye

    अटपटी-चटपटी