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    'हर' की नगरी में 'हरि' के दो माह

    Published: Sun, 14 Jun 2015 08:16 PM (IST) | Updated: Sun, 14 Jun 2015 08:17 PM (IST)
    By: Editorial Team
    lord-shiva 14 06 2015

    वाराणसी। हर (महादेव) की नगरी में इस बार दो माह हरि (भगवान विष्णु) को समर्पित होंगे। यह होगा कार्तिक से इतर अधिकमास के कारण जिसका योग एक अतिरिक्त आषाढ़ की वृद्धि के कारण बन रहा है। इस वृद्धि को अधिकमास, मलमास या पुरुषोत्तम मास कहते हैं। हालांकि पूरे देश में इस अवधि में लक्ष्मीनारायण का पूजन व स्नान दान किया जाता है, लेकिन काशी में यह खास हो जाता है।

    इस एक माहपर्यंत शैव-वैष्णव आराधना एकाकार होगी। एक ओर श्रीहरि की पूजा अर्चना तो दूसरी तरफ हर कृपा के निमित्त पंचकोसी यात्रा की जाती है। स्नान दान के साथ भगवान विष्णु को मालपुआ का भोग तो महादेव को विल्व पत्र अर्पण और स्वयंभू द्वादश ज्योतिर्लिंगों का रुद्राष्टाध्यायी मंत्रों से अभिषेक की परंपरा है।

    अधिकमास अर्थात अतिरिक्त आषाढ़ 17 जून से लग रहा है जो 16 जुलाई को खत्म होगा। वहीं एक अगस्त से सावन शुरू होगा। गौरतलब है कि जिस चंद्रमास में सूर्य की संक्रांति नहीं होती उसे अधिकमास कहते हैं। जिस राशि पर सूर्य का संचरण होता है, उसे उस राशि की संक्रांति कही जाती है। अधिकमास 32 माह 16 दिन चार घड़ी के अंतर पर आता है।

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