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    आरक्षित सीटें नहीं दिलाई, अब हर्जाना दे रेलवे

    Published: Wed, 17 Aug 2016 12:52 AM (IST) | Updated: Wed, 17 Aug 2016 12:54 AM (IST)
    By: Editorial Team
    railway 17 08 2016

    नई दिल्ली। शीर्ष उपभोक्ता आयोग ने उत्तर-मध्य रेलवे को छह यात्रियों को मुआवजा देने का निर्देश दिया है। हरिद्वार जाने वाली ट्रेन में आरक्षण होने के बावजूद यात्रियों को अनारक्षित के रूप में सफर करना पड़ा था। आयोग ने इसके लिए रेलवे को लापरवाही और सेवा में कमी का दोषी पाया है। पूछा, आरक्षित सीटें टिकट रिजर्वेशन कराने वालों को क्यों नहीं दिलाई?

    जस्टिस वीके जैन की अध्यक्षता वाले राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) ने कहा, शिकायतकर्ताओं ने आरक्षण की राशि का भुगतान किया था। वे आरक्षित सीटों पर यात्रा करने को अधिकृत थे, जिन्हें अनधिकृत लोगों ने हड़प लिया।

    एनसीडीआरसी ने राज्य आयोग के फैसले के खिलाफ रेलवे की अपील खारिज कर दी। आयोग ने कहा, अगर कुछ अनधिकृत लोगों ने शिकायतकर्ताओं के लिए आरक्षित सीटों पर कब्जा कर लिया तो रेल अधिकारी उन्हें खाली कराते।

    आयोग ने कहा, "कानपुर स्टेशन पहुंचने से पहले ट्रेन में शिकायतकर्ताओं की सीटें आरक्षित हो गईं। सीट उनके लिए आरक्षित थीं...यह याचिकाकर्ताओं (रेलवे अफसरों) का कर्तव्य था कि उक्त सीटें उन्हें मुहैया कराएं। अगर किसी अनधिकृत व्यक्ति ने शिकायतकर्ताओं की सीटों पर कब्जा कर लिया था तो उनसे सीट खाली कराना याचिकाकर्ताओं का कर्तव्य था। साथ ही शिकायकर्ताओं को सीटें मुहैया कराई जानी चाहिए थीं।

    आयोग ने उत्तर-मध्य रेलवे इलाहाबाद मंडल के महाप्रबंधक को रक्षा द्विवेदी और अन्य पांच को तीन-तीन हजार रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया। मानसिक तनाव तथा कानूनी मुकदमे के खर्च के रूप में 2,500 रुपये अदा करने को भी कहा।

    याचिका के मुताबिक, शिकायतकर्ताओं ने कानपुर से हरिद्वार जाने के लिए संगम एक्सप्रेस में 13 जून, 2011 की तिथि का आरक्षण कराया था, लेकिन रेल अधिकारियों से आग्रह के बावजूद उन्हें सीट मुहैया नहीं कराई गई।

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