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    RTI में मांगी ब्रह्मा, विष्णु, महेश की जानकारी, अधिकारियों के हाथ-पांव फूले

    Published: Sat, 18 Feb 2017 08:09 AM (IST) | Updated: Sat, 18 Feb 2017 08:36 AM (IST)
    By: Editorial Team
    brahma vishnu mahesh 18 02 2017

    विजयलक्ष्मी, नई दिल्ली। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) के अधिकारी इन दिनों देवी-देवताओं के इतिहास की खोज में जुटे हुए हैं। यह काम एसएसआइ के अधिकारियों के लिए चुनौती भी है और गले की फांस भी।

    यही वजह है कि करीब डेढ़ महीने पहले मांगी गई जानकारी का जवाब कई केंद्रों ने अब तक नहीं भेजा है। यह मुश्किल पैदा हुई है महाराष्ट्र के एक व्यक्ति की आरटीआइ से, जिसने राम-रावण, ब्रह्माा-विष्णु-महेश समेत 70 देवी-देवताओं के जन्म-मृत्यु की जानकारी चाही है।

    इस बारे में अधिकारी कहते हैं कि देवी-देवताओं की प्रामाणिकता के बारे में कुछ भी बोलना लोगों की आस्था पर सवाल उठाना है। इसलिए उन केंद्रों के लिए इसका जवाब देना ज्यादा मुश्किल हो रहा है जहां संबंधित देवी-देवताओं का जन्मस्थल माना जाता है।

    देशभर में हैं मंदिर और धाम

    दरअसल, हिंदू धर्म के देवी-देवताओं के इतिहास को जानने के लिए नागपुर के मनोज मारकंडे राव वाहने ने एएसआइ में सूचना का अधिकार के तहत जानकारी मांगी। उन्होंने भगवान राम, कृृष्ण, विष्णु, ब्रह्माा, महादेव शंकर, हनुमान, शनि देव, नारद, रावण की जन्म स्थल, जन्मतिथि, मृृत्युतिथि और स्थल की जानकारी मांगी है।

    इसके साथ देवी दुर्गा, लक्ष्मी, काली, पार्वती, शारदा के साथ ऋषि वाल्मीकि, गौतमबुद्ध, भगवान महावीर के जन्म व मृृत्यु के बारे में जानकारी मांगी है। कुल 70 देवी-देवताओं के इतिहास के बारे में जानकारी मांगी गई है। चूंकि देशभर में देवी-देवताओं के मंदिर और धाम हैं इसलिए एएसआइ ने सभी सर्कल में इस संबंध में जानकारी मांगी और आरटीआइ का जवाब देने को कहा।

    राय-मशविरा हो रहा, क्या जवाब दिया जाए

    हालांकि कुछ केंद्रों ने इस आरटीआइ के जवाब में कहा कि इस संबंध में उनके पास कोई जानकारी नहीं है। वहीं कुछ केंद्रों ने आरटीआइ जस की तस वापस भेज दी है, तो कुछ केंद्र इस बारे में आला अधिकारियों से राय-मशविरा कर रहे हैं कि क्या जवाब दिया जाए। अधिकारियों का कहना है कि यह सवाल धार्मिक आस्था से संबंधित है इसलिए इसका जवाब भी देना जरा मुश्किल है।

    एएसआइ के प्रवक्ता रामनाथ फोनिया ने बताया कि आरटीआइ के तहत जानकारी देने का काम सीपीआइओ का है। सभी केंद्रों को भेजी गई आरटीआइ का जवाब नियमों के अनुसार भेजा जाता है। इसलिए इस आरटीआइ का जवाब भी भेजा जा रहा है।

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    • Hari Sonkar22 Feb 2017, 09:15:43 PM

      परश्नकर्त अपना उद्गम बताये

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