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    चीन के "नेकलेस" का जवाब देने के लिए अहम हुआ श्रीलंका

    Published: Fri, 21 Apr 2017 10:03 PM (IST) | Updated: Sat, 22 Apr 2017 04:09 AM (IST)
    By: Editorial Team
    india sri lanka relations 21 04 2017

    जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली

    भारत के पड़ोसी देशों को लुभाने के लिए चीन की एक के बाद एक तिकड़म आजमाने की रणनीति को देखते हुए भारतीय कूटनीति में श्रीलंका की अहमियत बेहद बढ़ गई है। भारत अब अपने इस दक्षिणी पड़ोसी को "नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी" के तहत साथ ले कर चलने में सक्रिय कूटनीति का सहारा लेगा।

    श्रीलंका के पीएम रानिल विक्रमसिंघे की अगले हफ्ते भारत यात्रा पर पहुंचने के साथ इसकी शुरुआत होगी। इसके कुछ ही हफ्तों बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रीलंका की यात्रा करेंगे।

    भारत ने कुछ हफ्ते पहले नेपाल को कई तरह की नई आर्थिक मदद देने की घोषणा की है। इसके अलावा नेपाल में कूटनीतिक स्तर पर काफी कोशिशें की जा रही हैं। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने पिछले वर्ष ढाका यात्रा के दौरान बांग्लादेश को 24 अरब डॉलर की मदद देने की घोषणा की थी।

    लेकिन मोदी सरकार बांग्लादेश के साथ रिश्तों को परवान चढ़ाने में गंभीरता से जुटी है। कुछ दिन पहले ही बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना नई दिल्ली आई थीं। माना जा रहा है कि ढाका में ड्रैगन के बढ़ते कदम को थामने में भारत कुछ हद तक कामयाब हुआ है। इस क्रम में अब श्रीलंका की बारी है।

    मोदी ने वर्ष 2015 में श्रीलंका की द्विपक्षीय यात्रा कर यह संकेत दे दिया था कि कोलंबो के साथ रिश्तों को नई दिल्ली नए नजरिए से देख रहा है। मोदी श्रीलंका की द्विपक्षीय यात्रा पर 27 वर्ष बाद जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री थे। अब मोदी दो वर्ष बाद फिर कोलंबो की द्विपक्षीय यात्रा पर जाने वाले हैं। सूत्रों के मुताबिक, मोदी की यात्रा के दौरान श्रीलंका में त्रिंकोमाली बंदरगाह के विकास से जुड़ा अहम समझौता हो सकता है।

    सनद रहे कि चीन भी श्रीलंका में एक बड़ा पोर्ट (हमबनतोता) विकसित कर चुका है और एक अन्य पोर्ट के लिए दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है। अगर भारत के साथ श्रीलंका में पोर्ट विकसित करने का समझौता होता है तो ईरान और बांग्लादेश के बाद इस तरह का यह तीसरा समझौता होगा। ध्यान रहे कि ईरान में भारत चाबहार पोर्ट बना रहा है इसी महीने बांग्लादेश में भी एक पोर्ट विकसित करने का समझौता हुआ है।

    क्या है चीन का पर्ल नेकलेस

    चीन पाकिस्तान के ग्वादर से लेकर बंगाल की खाड़ी तक पांच नए पोर्ट बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है। इस रणनीति को "पर्ल नेकलेस" का नाम दिया गया है। इससे पूरे हिंद महासागर में चीन की नौ सेना की बादशाहत कायम हो सकती है।

    सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि अमेरिका व जापान जैसे देश भी इससे चिंतित है। लेकिन इसका सबसे ज्यादा असर भारत पर ही पड़ेगा। पाकिस्तान का ग्वादर पोर्ट पूरी तरह से चीन के नियंत्रण में आ चुका है। श्रीलंका के हमबनतोता बंदरगाह पर उसका पूरा नियंत्रण है।

    साथ ही इसके पास ही एक बड़ा मुक्त व्यापार क्षेत्र भी वह बना चुका है। चटगांव पोर्ट के लिए चीन, बांग्लादेश को मनाने में जुटा है। म्यांमार में दो पोर्ट चीन बना रहा है। यही वजह है कि देश के रणनीतिक विशेषज्ञ अगले एक महीने के भीतर भारत व श्रीलंका के शीर्ष स्तर पर दो बार वार्ता को लेकर खासे उत्साहित हैं।

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