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    जीएसटी में बीड़ी पर न दी जाए कोई राहत

    Published: Thu, 16 Feb 2017 08:22 PM (IST) | Updated: Fri, 17 Feb 2017 08:39 AM (IST)
    By: Editorial Team
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    नई दिल्ली। जीएसटी की नई व्यवस्था में बीड़ी पर दूसरे तंबाकू उत्पादों के मुकाबले कम कर लगाने की संभावना को देखकर स्वास्थ्य संगठन फिर उठ खड़े हुए हैं। इन्होंने सरकार से अपील की है कि तंबाकू के सभी उत्पाद जानलेवा हैं, इसलिए इन सभी उत्पादों को करों के सर्वोच्च स्लैब में रखा जाए और इन सभी पर अधिकतम सेस भी लगाया जाए।

    इनका कहना है कि अगर नई कर व्यवस्था में तंबाकू उत्पादों को लेकर कोई भी रियायत हुई तो इसका नुकसान लोक स्वास्थ्य पर बहुत गंभीर होगा। इस क्षेत्र में काम कर रहे गैर सरकारी संगठनों की ओर से वोलियंटरी हेल्थ एसोसिएशन ऑफ इंडिया (वीएचएआइ) की मुख्य कार्यकारी अधिकारी भावना मुखोपाध्याय कहती हैं, 'हर साल तंबाकू उत्पादों पर उत्पाद शुल्क में कम से कम दस फीसदी की प्रभावी बढ़ोतरी होती थी। मगर इस बार यह महज छह फीसदी की गई है। यह जन स्वास्थ्य को एक बड़ा झटका है।'

    इसी तरह बजट में हाथ से बनाई जाने वाली तेंदू पत्ते की बीड़ी पर पहले के वर्षों की तरह उत्पाद शुल्क में बढ़ोतरी नहीं की गई है। जबकि बीड़ी पीने वालों में 98 प्रतिशत इसी का सेवन करते हैं। इन संगठनों का कहना है कि बीड़ी को निचले स्लैब में रखने की तैयारी हो रही है। अगर ऐसा हुआ तो सबसे ज्यादा नुकसान गरीबों का होगा।

    भारत सहित दुनिया भर के शोध यह दिखाते हैं कि तंबाकू के उपयोग को कम करने के लिए कर बढ़ाना सबसे अच्छे उपायों में से एक है। सस्ती बीड़ी से ज्यादा लोग बीमार होंगे। तंबाकू की वजह से भारत में हर वर्ष लगभग दस लाख लोग मारे जाते हैं और देश में आज भी सबसे ज्यादा उपयोग किया जाने वाला तंबाकू उत्पाद बीड़ी ही है।

    विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) यह सिफारिश करता है कि तंबाकू उत्पादों पर कर की ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि इसके खुदरा मूल्य का कम से कम 75 फीसदी हिस्सा करों के रूप में जाए।

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