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    हनीप्रीत के लिए खुद रास्ता बनाती रही हरियाणा पुलिस

    Published: Sun, 17 Sep 2017 10:45 PM (IST) | Updated: Sun, 17 Sep 2017 10:51 PM (IST)
    By: Editorial Team
    hanifreet- 17 09 2017

    चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने जिस तरह से डेरा सच्चा सौदा में सर्च ऑपरेशन चलाने की रस्म निभाई है, ठीक उसी तर्ज पर राज्य पुलिस ने भी हनीप्रीत को भागने का बार-बार मौका देकर दरियादिली दिखाई।

    उदयपुर से गिरफ्तार गुरमीत के सहयोगी प्रदीप गोयल की प्रारंभिक पूछताछ में हनीप्रीत के नेपाल भागने का पता चला है, लेकिन पुलिस इसे मानने के लिए तैयार नहीं है।

    गुरमीत के पूर्व ड्राइवर खट्टा सिंह ने हनीप्रीत के उत्तराखंड, हिमाचल, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के चर्चा नामघरों में कहीं छिपे होने की आशंका जाहिर की है।

    उत्तर प्रदेश के एक पूर्व डीजीपी का तो यहां तक कहना है कि हरियाणा पुलिस को हनीप्रीत के बारे में सब कुछ मालूम है।

    उन्होंने सवाल खड़ा किया कि यदि पुलिस चाहे तो एक हनीप्रीत नहीं बल्कि उसकी जैसी सौ हनीप्रीत को 24 घंटे के अंदर ढूंढ़ निकाले। बता दें कि हनीप्रीत के नेपाल भागने की आशंका पहले दिन से जताई जा रही है।

    इसके बावजूद हनीप्रीत वास्तव में नेपाल भागने में कामयाब हो गई तो यह हरियाणा पुलिस के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।

    राज्य पुलिस का मानना है कि हनीप्रीत अभी नेपाल नहीं भागी, लेकिन बिहार और उत्तर प्रदेश के रास्ते नेपाल भाग सकती है।

    हरियाणा पुलिस ने अपनी आशंका से बिहार व उत्तर प्रदेश राज्यों की पुलिस को अवगत करा दिया है। बिहार पुलिस ने अपने राज्य के नेपाल से सटे सात जिलों में सतर्कता बढ़ा दी है।

    उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ में भी तलाश

    हनीप्रीत की तलाश में हरियाणा पुलिस की एक टीम उत्तराखंड के बनबसा भी पहुंची। सूत्रों के अनुसार पुलिस टीम ने एक जगह छापेमारी की और भारत-नेपाल सीमा पर कई स्थानों पर हनीप्रीत की फोटो दिखा कर लोगों से पूछताछ की। अलबत्ता स्थानीय पुलिस ने हरियाणा पुलिस की छापेमारी की सूचना से इन्कार किया है।

    फिलहाल हनीप्रीत के नेपाल भागने की आशंका के चलते उत्तराखंड पुलिस बॉर्डर पर अलर्ट है। दूसरी तरफ हनीप्रीत की तलाश में छत्तीसगढ़ में बिलासपुर के कोनी स्थिति गुरमीत के आश्रम में शनिवार को पुलिस पहुंची, लेकिन ताला बंद था। रविवार को ताला खोला गया लेकिन, कमरे में धूल के अलावा पुलिस को कुछ नहीं मिला। पुलिस बैरंग हो गई।

    गुरमीत से पूछा, तुम्हारे बारे में मांगी सूचनाएं दी जाएं या नहीं

    गुरमीत को जेल में खाने को क्या दिया जा रहा है? उसकी दिनचर्या किस तरह की है? इसके साथ ही कुछ अन्य जानकारियां पानीपत के समालखा निवासी आरटीआइ एक्टिविस्ट पीपी कपूर ने रोहतक के सुनारिया जेल अधीक्षक से आरटीआइ के जरिये मांगी है।

    गुरमीत से ही पूछ लिया गया कि इन सूचनाओं की जानकारी दी जाए अथवा नहीं। गुरमीत ने भी सहमति या असहमति नहीं जताई है, लेकिन जेल अधीक्षक ने उससे कहा है कि वह एक सप्ताह में अपनी राय से अवगत करा दे। यह अपने आप में एक अलग तरह का मामला है।

    जब दोषी से पूछा जा रहा कि उसके बारे में सूचनाएं दी जानी चाहिए या नहीं। कपूर के अनुसार जेल अधीक्षक ने इस आवेदन को तृतीय पक्ष का बताते हुए कैदी गुरमीत को आवेदन पत्र की प्रति सौंपकर उससे सात दिन में सहमति या असहमति मांगी है।

    कपूर ने कहा कि गुरमीत कैदी है और जनता को उसके बारे में जानने का हक है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी और जेल प्रशासन के संरक्षण के चलते जेल अधीक्षक सूचना को सार्वजनिक करने में अड़ंगे लगा रहे हैं।

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