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    हीट वेव को लेकर पहली बार तैयार हुई रिपोर्ट, अहमदाबाद ने ऐसे किया मौतों को कम

    Published: Sat, 20 May 2017 08:47 AM (IST) | Updated: Sat, 20 May 2017 08:57 AM (IST)
    By: Editorial Team
    hvi index 20 05 2017

    मल्टीमीडिया डेस्क। देश में हीट वेव यानी कितनी लू चल रही है और इससे कितने जिले इससे खतरनाक स्तर पर प्रभावित हैं, यह जानने के लिए देश में पहली बार हाल ही में एक रिपोर्ट तैयार की गई है। हीट वेव वर्नेबिलिटी इंडेक्स (HVI) नाम की इस रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने 10 जिलों को अधिकतम खतरे की सीमा में रखा है। रिपोर्ट को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ, गांधीनगर (IIPH-G) के शोधकर्ताओं ने तैयार किया है।

    इनमें से चार जिले मध्य प्रदेश के, दो जिले छत्तीसगढ़ के हैं। इसके अलावा झारखंड, राजस्थान, ओडिशा और गुजरात के एक-एक जिले इसमें शामिल हैं। इसमें देश के 97 जिलों को 'हाई रिस्क कैटेगिरी', 213 जिलों को हाई-नॉर्मल और 225 जिलों को 'लो-नॉर्मल' कैटेगिरी में रखा गया है। इस इंडेक्स में 75 जिलों को 'लो' HVI कैटेगिरी और 10 जिलों को 'वैरी लो' कैटेगिरी में रखा गया है। गर्मी से होने वाली मौतों को कम करना सबसे बड़ी चुनौती थी।

    दक्षिण एशिया में अहमदाबाद ने पहली बार बनाया प्लान

    दक्षिण एशिया में अहमदाबाद वह पहला राज्य बन गया, जिसने नागरिकों को गर्मी और लू के बारे में जानकारी देने के लिए एक्शन प्लान बनाया था। इसके तहत गर्मी और लू से बचने के तरीकों के बारे में लोगों को बताया गया था। साल 2010 में अहमदाबाद में जबरदस्त गर्मी और लू चली थी, जिसमें हीट-स्ट्रोक के 274 मामले सामने आए थे और पिछले सालों की तुलना में 1300 से अधिक मौतें हुई थीं। वहीं, साल 2015 में अहमदाबाद में गर्मी से बचने का एक्शन प्लान होने के कारण हीट स्ट्रोक के महज 57 मामले सामने आए थे, जबकि मौतों की संख्या 11 तक सीमित हो गई थी।

    यह किया गया था इस प्लान में शामिल

    एक्शन प्लान में लोगों को गर्मी से बचने के तौर-तरीकों के बारे में जानकारी दी गई थी। इसमें उन्हें बताया गया था कि क्या करना है और क्या नहीं। अखबारों में विज्ञापन देने के साथ ही जगह-जगह पर्चे लगवाकर लोगों को जागरुक किया गया था। इस पहल ने भारत और दुनिया भर के उन शहरों का ध्यान खींचा, जहां गर्मी के कारण लोग परेशान थे। पर्चों में लिखा था-

    - प्यास नहीं भी लग रही हो, तो भी ज्यादा से ज्यादा ठंडा पानी पीएं।

    - यदि धूप में बाहर निकलना जरूरी हो, तो भरी दोपहर में ब्रेक लें, छांव में आराम करें।

    - जरूरत से ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी करने से बचें।

    - ठंडा, गीला कपड़ा सिर पर रख कर चलें, जिससे गर्मी से बचा जा सके।

    - पंखे, डेजर्ट कूलर और एसी का इस्तेमाल करें।

    - मेडिकल हेल्प के लिए एंबुलेंस को कॉल करें। जिन जगहों से ज्यादा हीट स्ट्रोक के मामले सामने आ रहे थे, वहां एंबुलेस की तैनाती की गई।

    सबसे कम खतरा केरल, गोवा और लक्ष्यद्वीप में

    हीट वेव से सबसे कम खतरे की श्रेणी में जिन जिलों को रखा गया है, उनमें केरल, गोवा और लक्ष्यद्वीप के जिले शामिल हैं। गौरतलब है कि अधिक गर्मी और लू के कारण साल 2016 में 1,100 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। वहीं, साल 2015 में करीब 2,200 लोगों की मौत हुई थी। अधिकांश राज्य गर्मी और लू से होने वाली मौतों की रिपोर्ट नहीं बनाते हैं और बहुत कम ही शहरों में गर्मी से निपटने के लिए एक्शन प्लान होता है।

    यह जानकारी IIPH-G के डायरेक्टर डॉक्टर दिलीप मावलंकर ने दी, जिन्होंने अहमदाबाद में हीट एक्शन प्लान बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। लू को घोषित तब की जाती है, जब अधिकतम तापमान लगातार दो दिनों तक 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक बना रहता है और तापमान सामान्य से 4.5 डिग्री सेल्सियस अधिक होता है। पहाड़ी इलाकों में तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने पर लू की चेतावनी दी जाती है।

    सबसे अधिक हीट-वेव इंडेक्स वाले जिले

    छत्तीसगढ़- दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा

    झारखंड- पाकुर

    मध्य प्रदेश- अलीराजपुर

    मध्य प्रदेश- श्योपुर

    मध्य प्रदेश- बड़वानी

    राजस्थान- बैंसवाड़ा

    मध्य प्रदेश- झाबुआ

    ओडिशा- मलकानगिरी

    गुजरात- दाहोद

    छत्तीसगढ़- बीजापुर

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