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    प्रधानमंत्री जी! आपकी एक हां से संवर सकती हैं पांच जिदगी

    Published: Fri, 21 Apr 2017 07:44 PM (IST) | Updated: Sat, 22 Apr 2017 04:50 AM (IST)
    By: Editorial Team
    aims hospital 21 04 2017

    हरेंद्र नागर, फरीदाबाद

    प्रधानमंत्री जी! आपकी एक हां से हमारी जिदगी संवर सकती हैं। यह विनती है कॉन्जिनिटल स्कोलियोसिस बीमारी से जूझ रहे पांच बच्चों की। इनमें फरीदाबाद के इस्माइलपुर की 16 वर्षीय प्रीति, नई दिल्ली की 19 वर्षीय निकिता, लखनऊ की 25 वर्षीय रेशमा के अलावा 11 व 12 वर्षीय दो बच्चे शामिल हैं।

    इस बीमारी से उनकी रीढ़ की हड्डी अंग्रेजी के "एस" के आकार में इस हद तक मुड़ गई है कि वे खड़े होकर नहीं चल सकते। ऑपरेशन से ही रीढ़ की हड्डी को सीधा किया जा सकता है, लेकिन ऑपरेशन बहुत महंगा और कठिन है। डॉक्टर इसके लिए तैयार नहीं होते।

    अपोलो अस्पताल, दिल्ली के पेडिक्स विभाग के सीनियर स्पाइनल सर्जन डॉ. राजगोपालन कृष्णन इनका निश्शुल्क ऑपरेशन करने के लिए तैयार हैं। यह ऑपरेशन ओ आर्म नाम की मशीन से होगा। इसकी कीमत करीब 7 करोड़ रुपए है। भारत में यह मशीन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान दिल्ली (एम्स) में ही है।

    डॉक्टर राजगोपालन ने एम्स से ओ आर्म मशीन पर उन बच्चों का ऑपरेशन करने की अनुमति मांगी थी, लेकिन एम्स प्रबंधन की ओर से कहा गया कि प्रधानमंत्री कार्यालय से इसकी अनुमति मिल सकती है। डॉक्टर राजगोपालन ने बच्चों की ओर से करीब एक महीने पहले प्रधानमंत्री कार्यालय को चिट्ठी लिखकर अनुमति मांगी थी, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है।

    - मेरे पिता चालक की नौकरी करते हैं। वह मेरी बीमारी का इलाज नहीं करा सकते। जब मैंने होश संभाला तो पता चला कि मैं सामान्य नहीं हूं। 12 वर्ष की आयु में ही मैंने ठान लिया था कि मैं भी सीधे होकर चलूंगी। इसके लिए कई डॉक्टरों को दिखाया। एम्स में भी डॉक्टरों को दिखाया। उनके पास मशीनें तो हैं लेकिन कोई डॉक्टर मेरा ऑपरेशन करने के लिए तैयार नहीं हैं। मेरी ही तरह अन्य बच्चों की भी कहानी है। डॉक्टर राजगोपालन पिछले करीब एक साल से हमारी जांच व इलाज करने के बाद ऑपरेशन करने के लिए तैयार हुए हैं। मगर अब मशीन की अड़चन आ गई है। - प्रीति, इस्मालाइलपुर फरीदाबाद।

    - इस बीमारी में जैसे जैसे उम्र बढ़ती जाती है रीढ़ की हड्डी और अधिक मुड़ती जाती है। इसके बाद ऑपरेशन और मुश्किल होता है। आगे चलकर रीढ़ की हड्डी इतनी मुड़ जाती है कि मरीज चल फिर भी नहीं सकता। - डॉक्टर राजगोपालन कृष्णन, अपोलो अस्पताल, दिल्ली।

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