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    1962 में भारत-चीन के बीच इस कारण शुरू हुई थी जंग, आप भी जानिए ये वजह

    Published: Tue, 18 Jul 2017 10:21 AM (IST) | Updated: Tue, 18 Jul 2017 09:40 PM (IST)
    By: Editorial Team
    india china war 18 07 2017

    मल्टीमीडिया डेस्क। भारत और चीन के बीच डोकलाम में सीमा को लेकर तनाव जारी है। चीन लगातार भारत को 1962 के युद्ध को याद करते हुए धमकियां दे रहा है। हालांकि भारत ने भी बता दिया है तब और अब में काफी अंतर है।

    1962 के जंग को सिनो-इंडिया वॉर ऑफ 1962 के नाम से जाना जाता है। जिस युद्ध को लेकर चीन लगातार धमकियां दे रहा है उसके लिए भारत कभी तैयार ही नहीं था। भारत को लगा था कि चीन हमला नहीं करेगा और शायद यही कारण था कि उसे इतना नुकसान उठाना पड़ा।

    यह थे युद्ध के कारण

    - भारत की 1947 में आजादी और 1949 में चीनी गणराज्य बनने के बाद भारत सरकार चीन के साथ अच्छे संबंधों की नीति पर चल रही थी।

    - जब चीन ने कहा कि वो तिब्बत पर कब्जा करने जा रहा है तो भारत ने इसका विरोध करते हुए एक पत्र भेजा जिसमें तिब्बत को लेकर बातचीत करने की मांग की गई। इस दौरान चीन, अक्साई चीन पर सेना तैनात करने में ज्यादा रूचि दिखा रहा था।

    - भारत, चीन से अपने संबंधों को लेकर इतना चिंतित था कि उसने जापान के साथ शांति संधि के समापन की कॉन्फ्रेंस में शामिल होने से सिर्फ इसलिए इन्कार कर दिया क्योंकि उसमें चीन को नहीं बुलाया गया था। यहां तक की भारत चीन के कई वैश्विक मामले में प्रतिनिध तक बनने को तैयार था क्योंकि चीन को कई मुद्दों से बाहर कर दिया गया था।

    - 1954 में भारत और चीन ने शांतिपूर्ण सहयोग के पंचशील सिद्धांत बनाए जिनमें भारत ने तिब्बत को चीन का हिस्सा मान लिया। इस दौरान तात्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने नारा दिया था हिंदी-चीनी भाई-भाई।

    - 1954 में ही प्रधानमंत्री नेहरू ने चीन को मेमो भेजा जिसमें दोनों देशों की सीमाओं को लेकर नक्शा तैयार करने की बात कही गई थी। हालांकि तब भारत का करीब 120,000 वर्ग किलोमीटर हिस्सा चीन में दिखाया जा रहा था। जब इसे लेकर सवाल उठे तो चीन के पहले प्रीमियर झोउ इनलाई ने इसे नक्शे की गलती करार दिया।

    - 1959 में दलाई लामा के भारत आने और उनके स्वागत से माओ झेडोंग ने खुद को अपमानित महसूस किया और दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने लगा। यह तब और बढ़ गया जब माओ ने एक बयान में कहा कि तिब्बत में ल्हासा विद्रोह भारत की वजह से हुआ।

    - इस दौरान चीन को तिब्बत में अपने शासन के खिलाफ भारत बड़ा खतरा नजर आने लगा और यह मुद्दा सबसे अहम हो गया। यही वो सबसे बड़ा कारण था जिसके चलते 1962 में भारत और चीन के बीच युद्ध हुआ।

    - 1959 में भारत को लगा कि वो युद्ध के लिए तैयार नहीं है और विवादित इलाके से अपनी सेना पीछे ले ली।

    - 1962 में दोनों देशों की सेनाओं के बीच कई झड़पें हुई लेकिन 10 जुलाई 1962 को 350 चीनी सैनिकों ने चुशुल में भारतीय पोस्ट को घेर लिया और गोरखाओं से अपील की कि वो भारत की तरफ से ना लड़ें।

    - 20 अक्टूबर 1962 को चीन की सेना ने भारत में घुसपैठ करते हुए लद्दाख के इलाके से मैकमोहन लाइन पार कर ली। अब तक भारत यही सोच रहा था कि चीन हमला नहीं करेगा और इसके चलते उसने सीमा पर केवल सेना की दो ही टुकड़ियां तैनात की थीं।

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