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    बच्चे की आंख में घुसी कील, पांच अस्पतालों ने नहीं किया भर्ती

    Published: Mon, 17 Jul 2017 09:42 AM (IST) | Updated: Wed, 19 Jul 2017 02:09 PM (IST)
    By: Editorial Team
    nail eye 17 07 2017

    कोलकाता। एक लड़के की एक आंखों में कील घुस गई थी और इसके दर्द से वह 10 घंटे तक बिलखता रहा। कथिततौर पर शनिवार को शहर के पांच सरकारी अस्पतालों ने उसका इलाज करने के लिए भर्ती नहीं किया। लड़का दक्षिण 24 परगना के जिबंतला में करीम मोहल्ला का रहने वाला है।

    बताया जा रहा है कि शनिवार को करीब 12 बजे अपने घर के सामने बन रही इमारत में आठ साल का लड़का खेल रहा था। तभी दुर्घटनावश उसकी बाईं आंख में कील घुस गई थी। उसकी आंख से तेजी से खून निकलता देखकर परिजन उसे जिले में कैनिंग सब-डिवीजन अस्पताल में ले गए।

    वहां से उसे कलकत्ता नेशनल मेडिकल कॉलेज और पार्क सर्कस में अस्पताल भेजा गया था। मगर, वहां भी बच्चे को भर्ती नहीं किया गया। वहां से करीम को एसएसकेएम अस्पताल में भेजा गया, जो दक्षिण कोलकाता में एकमात्र सरकारी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल था। मगर, उसे वहां भी डॉक्टरों ने भर्ती नहीं किया।

    बाद में उसे बंगूर इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोलॉजी में भेजा गया। हालांकि, उसे यहां भी राहत नहीं मिली और उसे कलकत्ता मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑप्थेमोलॉजी में भेज दिया गया। यहा से उसे नील रतन सिरकार मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में भेजा गया था, जिसने पहले तो बच्चे को भर्ती करने से मना कर दिया था।

    मगर, करीम के परिवार की ओर से बार-बार मदद की गुहार लगाने के बाद एनआरएसएमसीएच के अधिकारियों ने रात में लड़के को भर्ती किया। डॉक्टरों ने करीम का 3 डी सीटी स्कैन किया, ताकि पता लगाया जा सके कि उसके मस्तिष्क को तो नुकसान नहीं हुआ है। इससे पहले किए गए सीटी स्कैन में बताया गया था कि उसके मस्तिष्क के फ्रंट लोब पर चोटों के निशान थे।

    कील को उसकी आंख से निकाल दिया गया है और अब करीम की हालत स्थिर है, लेकिन चिकित्सक सुनिश्चित नहीं हैं कि उसकी नजर वापस आएगी या नहीं। बच्चे को अस्पताल में भर्ती नहीं करने की खबर जैसे ही सरकार तक पहुंची, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मामले पर हस्तक्षेप किया और चिंता व्यक्त की। मुख्यमंत्री के कार्यालय ने करीम के परिवार और अस्पताल के अधिकारियों के साथ समन्वय करने के लिए एनआरएसएमसीएज में एनजीओ अधिकारियों की एक टीम भेजी है।

    सूत्रों के मुताबिक, राज्य स्वास्थ्य विभाग ने पांच सरकारी अस्पतालों द्वारा की गई लापरवाही की जांच करने का फैसला किया है। गौरतलब है कि ममता बनर्जी स्वास्थ्य मंत्री भी हैं। एनआरएसएमसीके के उपाधीक्षक डॉ. द्विपायन बिस्वास ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा कि मीडिया में खबर आने के बाद उन्हें इस मामले की जानकारी हुई। तब मैंने पूछताछ की तो पता चला कि डॉक्टर पहले से ही बच्चे का इलाज कर रहे थे।

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