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    कबड्डी से लगाव के चलते संघ से जुड़े थे देश के नए उपराष्‍ट्रपति वेंकैया नायडू

    Published: Tue, 18 Jul 2017 09:27 AM (IST) | Updated: Sat, 05 Aug 2017 07:37 PM (IST)
    By: Editorial Team
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    नई दिल्ली। वेंकैया नायडू देश के 15 वें उपराष्‍ट्रपति बन गए हैं। आइये जानते हैं उनके जीवन के बारे में कुछ रोचक पहलू।

    नायडू कभी लोकसभा सदस्य नहीं रहे लेकिन उन्होंने अपनी संगठन क्षमता का लोहा मनवाया है। उनके आरएसए और फिर भाजपा ने आने की कहानी बेहद रोचक है।

    70 के दशक में जब दक्षिण में जनसंघ का नाममात्र का वजूद था, एक युवा पार्टी कार्यकर्ता अटल बिहारी वाजपेयी और एलके आडवाणी के पोस्टर दीवारों पर चिपकाया करता था। वह युवा कार्यकर्ता ही आज राजग की तरफ से उपराष्ट्रपति उम्मीदवार घोषित किया गया है। वैसे मुप्पावरापु वेंकैया नायडू गारु का राजनीति में आना खेल-खेल में शुरू हुआ था।

    छात्र जीवन में 1963 में वह पहली बार आरएसएस से कबड्डी के प्रति लगाव के चलते जुड़े थे। धीरे-धीरे यह बढ़ता गया। वहीं रहते 1967 में पहली बार अटल बिहारी वाजपेयी से मिले। उस वक्त वाजपेयी एक कार्यक्रम में आए थे और उद्घोषणा की जिम्मेदारी वेंकैया को मिली थी। युवावस्था में आए तो जेपी आंदोलन ने लुभाया। बहरहाल उसके बाद से वह राजनीति के रथ पर सवार हो गए।

    आडवाणी को गुरु मानते हैं

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी पहली मुलाकात 1993 में तब हुई थी, जब दोनों पार्टी महासचिव थे। मोदी गुजरात में थे और वेंकैया केंद्र में। वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी के बाद पार्टी में सबसे वरिष्ठ वेंकैया खुद को आडवाणी का शिष्य करार देते हैं।

    यूं आए राष्ट्रीय राजनीति में

    आंध्र प्रदेश के नैल्लोर जिले में उदयगिरी विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक चुने जाने के बाद राष्ट्रीय राजनीति में उनका प्रवेश हुआ। वह खुद इसका इजहार करते रहे हैं कि आडवाणी के अध्यक्षीय काल में उन्हें महासचिव पद की जिम्मेदारी दी गई थी।

    आडवाणी से सीखी संगठन कला

    संगठन की कला उन्होंने आडवाणी से ही सीखी। यह राजनीति का खेल है कि जिस रामनाथ कोविंद को वेंकैया ने दलित मोर्चे का अध्यक्ष बनाया था, अब वह उनके ऊपर राष्ट्रपति पद पर आसीन होंगे।

    जनसंघ में आए तो डराया था

    68 वर्षीय वेंकैया ने जब पहली बार जनसंघ में प्रवेश के बारे में सोचा था तो उन्हें डराया गया था। कहा गया वहां गए तो मांस-मछली बंद करना होगा। मुखर वेंकैया ने तत्काल पता लगाया। जब स्पष्ट हो गया कि जनसंघ में आहार पर पाबंदी नहीं तो वह आश्वस्त हुए।

    तब बोले थे मैं उषापति बनकर ही खुश

    इसी साल मई में पत्रकारों के सवाल पर वेंकैया ने खुद को राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति पद की दौड़ से बाहर बताया था। उन्होंने कहा था, "न मैं राष्ट्रपति बनना चाहता हूं, न उपराष्ट्रपति...। मैं "उषापति" बनकर ही खुश हूं...।" मालूम हो, उनकी पत्नी का नाम एम. उषा है। इनके एक बेटा और एक बेटी है।

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