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    सक्रांति पर हादसा, पटना में दो नावें डूबीं, 21 मरे

    Published: Sat, 14 Jan 2017 07:53 PM (IST) | Updated: Sun, 15 Jan 2017 01:21 AM (IST)
    By: Editorial Team
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    पटना। पटना के गांधी घाट के पास गंगा में शनिवार शाम दो नावें एक साथ डूब गईं। इसमें 21 लोगों की मौत हो गई। नावों पर 100 से अधिक लोग सवार थे। मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती है।

    बचाव दल ने गंगा से 50 से अधिक लोगों को निकाला। आठ घायलों को पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) में भर्ती कराया गया है। देर रात तक दर्जनों लोगों के लापता होने की खबर आती रही।

    मकर संक्रांति पर दियारा में पतंगोत्सव का आयोजन हुआ था। सभी उसी में शामिल होकर लौट रहे थे। दियारा में सुबह से भारी भीड़ थी। शाम ढलते ही पुलिस वाले लोगों को खदेड़ने लगे।

    लोग इस पार आने के लिए नावों पर असुरक्षित ढंग से सवार हो गए। दूसरी तरफ गांधीघाट पर भी न तो सुरक्षा के इंतजाम थे, न ही बचाव के। आधे घंटे के बाद बचाव कार्य शुरू हो पाया।

    घाट से पीएमसीएच तक अफरातफरी मची। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राज्यपाल रामनाथ कोविंद ने घटना पर शोक जताया है। मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दिए हैं। नीतीश ने कहा कि सभी मृतकों के आश्रितों को अविलंब चार-चार लाख रुपये अनुग्रह राशि का भुगतान किया जाएगा।

    अव्यवस्था रहा कारण

    मकर संक्रांति पर पर्यटन विभाग ने पतंगोत्सव का आयोजन किया था। दोपहर से ही वहां अव्यवस्था का माहौल था। मुफ्त पतंगें बांटी जा रही थीं। घाट पर काफी भीड़ थी। दिन में भी पतंग लेने की होड़ में भीड़ अनियंत्रित हुई थी। पुलिस वालों ने बिना कुछ सोचे लाठीचार्ज कर दिया, जिससे भगदड़ की स्थिति बन गई थी।

    वहीं, गंगा पार कर दियारा जाने वालों की भी लंबी कतार लगी थी। प्रशासन की आरे से पटना शहर की ओर से दियारा पहुंचाने की व्यवस्था तो कर दी गई थी, लेकिन वापस आने के लिए लोगों को खुद जिद्दोजहद करनी पड़ रही थी। विभागीय स्तर पर एक स्टीमर की व्यवस्था की गई थी, जो पर्याप्त नहीं थी।

    अंधेरा होने पर दियारा में तैनात पुलिस वालों ने लोगों को खदेड़ना शुरू कर दिया। ठंड बढ़ रही थी। लोग लौटने के लिए बेचैन हो रहे थे। इस बीच उन्हें सब्जी लदी दो नावें दिखीं, जो सबलपुर दियारा से आ रही थीं। पहले से ही उस पर एक दर्जन लोग सवार थे। जल्द घर लौटने को परेशान लोगों ने उन नावों को रोका।

    नाविकों ने लोगों से 30-30 रुपये ले लिए और बिठा लिया। चश्मदीद छात्र विपुल के मुताबिक उन नावों में नीचे से पानी रिस रहा था। कुछ लोगों ने दुर्घटना की आशंका को भांप लिया और वे उतर गए।

    हालांकि एक सौ से अधिक लोग नावों पर बैठ गए थे। गंगा में कुछ दूर जाते ही दोनों नाव डगमगाने लगीं। अफरातफरी मच गई। कुछ लोगों ने नदी में छलांग दी, जिससे नावों का संतुलन बिगड़ गया और दोनों डूब गईं।

    कुछ तो जैसे-तैसे तैरकर आ गए, कुछ को स्थानीय लोगों ने बचाया। चश्मदीदों के मुताबिक 50-70 लोग लापता हैं। आपदा प्रबंधन की टीम मौके पर पहुंची और देर रात तक बचाव कार्य चला।

    त्योहार पर तीसरा हादसा

    2012 में पटना में ही छठ के दौरान भगदड़ में 18 लोग मरे थे। 2014 में दशहरा के दौरान गांधी मैदान में भी भगदड़ मची थी, जिसमें 33 लोग मारे गए थे। मकर संक्रांति पर एक और हादसा सिर्फ अव्यवस्था की वजह से हुआ।

    जदयू का चूड़ा-दही भोज रद, लालू ने भी रविवार को भोज किया रद

    पटना : बिहार के सियासी गलियारे में पूरे दिन शनिवार को मकर संक्रांति पर उत्सव का माहौल रहा, लेकिन नाव हादसे से शाम में माहौल गमगीन हो गया।

    जदयू ने रविवार को वशिष्ठ नारायण सिंह के आवास पर आयोजित होने वाला दही-चूड़ा भोज रद कर दिया। लालू ने भी रविवार को अल्पसंख्यक वर्ग और अन्य लोगों के लिए भोज का आयोजन किया था।

    उसे भी रद कर दिया गया। जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने नाव दुर्घटना पर दुख प्रकट करते हुए कहा कि इस दुखद घड़ी में भोज का प्रश्न ही नहीं है।

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