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    इंसानों जैसे हकः गंगा-यमुना के नाम से दाखिल हो सकते हैं मुकदमे

    Published: Tue, 21 Mar 2017 08:08 AM (IST) | Updated: Tue, 21 Mar 2017 11:17 AM (IST)
    By: Editorial Team
    ganga-living-entities 21 03 2017

    नई दिल्ली। देश में पहली बार गंगा-यमुना को भी जीवित व्यक्ति की तरह अधिकार मिल गया है। यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया है उत्तराखंड हाई कोर्ट ने। फैसले के बाद गंगा-यमुना नदियों को लीगल स्टेटस मिल गया है। हाई कोर्ट ने आठ सप्ताह में गंगा प्रबंधन बोर्ड बनाने का आदेश भी केंद्र सरकार को दिया है। हरिद्वार निवासी मोहम्मद सलीम ने जनहित याचिका दायर कर यमुना से निकलने वाली शक्तिनहर ढकरानी को अतिक्रमण मुक्त करने तथा उत्तराखंड-उत्तर प्रदेश के बीच नदियों व परिसंपत्तियों का बंटवारा करने की अपील की थी।

    फैसले का होगा ये असर

    - गंगा के खिलाफ तथा गंगा की ओर से मुकदमे सिविल कोर्ट तथा अन्य अदालतों में दाखिल किए जा सकते हैं।

    - गंगा में कूड़ा फेंकने तथा पानी कम होने, गंगा में अतिक्रमण होने पर मुकदमा होगा तो गंगा की ओर से मुख्य सचिव, महाधिवक्ता, महानिदेशक निर्मल गंगा वाद दायर करेंगे।

    - यदि गंगा नदी के पानी से किसी का खेत बह गया या उसमें गंदगी आ गई तो संबंधित व्यक्ति गंगा नदी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर सकता है।

    न्यूजीलैंड की बांगक्यू नदी का हवाला दिया

    सोमवार को वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने बताया कि न्यूजीलैंड में स्थित बांगक्यू नदी को जीवित मानव के समान अधिकार दिए गए हैं। इसलिए गंगा-यमुना को भी जीवित मानव की तरह अधिकार दिए जाने चाहिए। अदालत ने अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए दोनों नदियों को जीवित मानव की तरह अधिकार प्रदान करते हुए गंगा-यमुना की तरफ से नमामि गंगे अथॉरिटी, मुख्य सचिव, महाधिवक्ता को इस संबंध वाद दायर करने के लिए अधिकृत भी कर दिया है।

    अभी नहीं तो कभी नहीं

    न्यायिक सक्रियता व केंद्र-राज्य में बनी नई सरकारों की गंगा को लेकर प्रतिबद्धता के बाद गोमुख से लेकर गंगासागर तक गंगा के प्रदूषण मुक्त होने की उम्मीद बढ़ गई है। हाईकोर्ट का फैसला इस दिशा में अहम रहने वाला है।

    गंगा

    कुल लंबाई : 2525 किमी (देश की सबसे लंबी नदी)

    उद्गम : गोमुख (गंगोत्री ग्लेशियर)

    मुहाना : बंगाल की खाड़ी

    गंगा बेसिन का कैचमेंट एरिया : 8,61,404 वर्ग किमी (भारत का 26.4 फीसद)

    43 फीसद आबादी की आजीविका आश्रित

    सफाई अभियानः पिछले 30 वर्षों के दौरान मोक्षदायिनी को निर्मल-अविरल बनाने के लिए दो चरणों में गंगा एक्शन प्लान (गैप) शुरू किया गया। इसके अलावा तमाम सहकारी, सामाजिक प्रयासों के अलावा महत्वाकांक्षी एनजीआरबीए का गठन भी किया गया।

    गंगा एक्शन प्लान - 1

    गंगा को स्वच्छ करने के लिए गंगा एक्शन प्लान पहली बार जून, 1985 में शुरू किया गया। मार्च, 2000 में इसे बंद कर दिया गया। कुल 451.70 करोड़ रकम खर्च की गई।

    गंगा एक्शन प्लान - 2

    1993 और 2009 तक इसे चलाया गया। इसमें गंगा की प्रमुख सहायक नदियों को भी शामिल किया गया। इसके अलावा इसके तहत 95 शहर और कस्बों पर फोकस रहा। कुल 838 करोड़ रुपए खर्चे गए।

    एनजीआरबीए : फरवरी, 2009 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण का गठन किया गया। इसके तहत कुल 835.34 करोड़ रकम खर्च की गई।

    राष्ट्रीय नदी का दर्जा : 2008-09 में गंगा को राष्ट्रीय नदी का दर्जा मिला।

    यमुना

    कुल लंबाई : 1,376 किमी

    उद्गम : यमुनोत्री, उत्तराखंड

    गंगा में संगम : इलाहाबाद

    यमुना एक्शन प्लान : 1993 में जापान सरकार की मदद से प्रोजेक्ट शुरू। जापान बैंक की ओर से 10.27 अरब रुपए निवेश की घोषणा। अब तक दो चरण पूरे। कुल 1,453.17 करोड़ खर्च।

    मई 2016 में "मैली से निर्मल यमुना पुनरुद्धार-2017" योजना शुरू की गई। इसके अंतर्गत पहले चरण के लिए 1,969 करोड़ रुपए आवंटित।

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