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    वेंकैया नायडू ने भरा नामांकन, भावुक होकर बोले- 2019 में मोदी को जिताना चाहता था

    Published: Tue, 18 Jul 2017 08:26 AM (IST) | Updated: Tue, 18 Jul 2017 09:40 PM (IST)
    By: Editorial Team
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    नई दिल्ली। एनडीए के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार चुने गए वेंकैया नायडू अपना नामांकन भर दिया है। नामांकन भरने के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए नायडू भावुक होते हुए बोले की पार्टी से दूर जाना दर्दभरा है लेकिन अब में भाजपा का हिस्सा नहीं हूं। मैंने अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है।

    नायडू ने कहा कि कम उम्र में मेरी मां का निधन हो गया था और पार्टी ने मुझे मेरी मां की तरह पाल पोस कर बड़ा किया है। मैं पिछले 40 सालों से सक्रीय राजनीति में रहा हूं और यह मेंरे लिए बेहद भावुक पल है। उपराष्ट्रपति का पद और काम अलग है। मैं कोशिश करूंगा की उसका पूरा सम्मान कायम रखते हुए काम कर सकूं। लोकतंत्र हमारे देश की नींव है और कोशिश करूंगा की इस नींव को और मजबूत कर सकूं। उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार चुने जाने पर गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं।

    इससे पहले उन्होंने अपना नामांकन दाखिल किया और इस मौके पर उनके साथ पीएम मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी व अन्य मौजूद थे। इससे पहले नायडू ने केंद्रीय मंत्री के पद से इस्तीफा दिया।

    नामांकन के लिए घर से निकले नायडू ने पहले पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की और फिर संसद भवन पहुंचे। उनके अलावा यूपीए उम्मीदवार गोपाल कृष्ण गांधी भी कुछ देर बाद अपना नामांकन भरेंगे।

    खबरों के अनुसार रामनाथ कोविंद की ही तरह वेंकैया नायडू की भी जीत लगभग तय है। बता दें कि राष्ट्रपति चुनाव के लिए हुए मतदान के बाद भाजपा की संसदीय दल की बैठक में जेपी नड्डा ने नायडू का नाम प्रस्तावित किया और इसके बाद सभी ने उनके नाम को सहमति दे दी। अमित शाह ने मीडिया के सामने उनके नाम की घोषणा की।

    ऐसे हुई राजनीतिक जीवन की शुरुआत, कभी लोकसभा नहीं जीते

    वेंकैया का जन्म 1 जुलाई 1949 को आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले के चावटपलेम के एक कृषक परिवार में हुआ था। उन्होंने वीआर हाई स्कूल नेल्लोर से स्कूली शिक्षा पूरी की और वीआर कॉलेज से राजनीति तथा राजनयिक अध्ययन में ग्रेजुएशन किया। आंध्र विश्वविद्यालय, विशाखापत्तनम से लॉ की डिग्री ली। 1974 में वह आंध्र विश्वविद्यालय में छात्र संघ के अध्यक्ष के रूप में निर्वाचित हुए। कुछ दिन तक आंध्र प्रदेश के छात्र संगठन समिति के संयोजक भी रहे। दो बार आंध्रप्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे। हालांकि वह कभी लोकसभा सदस्य नहीं रहे। राज्यसभा से तीन बार चुने गए। फिलहाल राजस्थान से राज्यसभा सदस्य है।

    यह है उपराष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया

    उपराष्ट्रपति का चुनाव परोक्ष होता है जिसके निर्वाचक मंडल यानी इलेक्टोरल कॉलेज में राज्यसभा और लोकसभा के सांसद शामिल होते हैं। दोनों सदनों के लिए मनोनीत सांसद भी उपराष्ट्रपति चुनाव में वोटिंग कर सकते हैं। इस तरह उपराष्ट्रपति चुनाव में दोनों सदनों के 790 निर्वाचक हिस्सा लेंगे।

    राज्यसभाः चुने हुए सदस्य - 233, मनोनीत सदस्य - 12

    लोकसभाः चुने हुए सदस्य - 543, मनोनीत सदस्य - 2कुल निर्वाचक - 790

    चुनाव ऐसे होता है

    उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधि पद्घति से किया जाता है। इसमें वोटिंग खास तरीके से होती है जिसे सिंगल ट्रांसफरेबल वोट सिस्टम कहते हैं। इसमें मतदाता को वोट तो एक ही देना होता है मगर उसे अपनी पसंद के आधार पर प्राथमिकता तय करनी होती है। वह मतपत्र पर मौजूद उम्मीदवारों में अपनी पहली पसंद को 1, दूसरी पसंद को 2 और इसी तरह से आगे की प्राथमिकता देता है।

    ऐसे होती है वोटों की गिनती

    सबसे पहले यह देखा जाता है कि सभी उम्मीदवारों को पहली प्राथमिकता वाले कितने वोट मिले हैं। फिर सभी को मिले पहली प्राथमिकता वाले वोटों को जोड़ा जाता है। कुल संख्या को 2 से भाग किया जाता है और भागफल में 1 जोड़ दिया जाता है। अब जो संख्या मिलती है उसे वह कोटा माना जाता है जो किसी उम्मीदवार को काउंटिंग में बने रहने के लिए जरूरी है।

    अगर पहली गिनती में ही कोई प्रत्याशी जीत के लिए जरूरी कोटे के बराबर या इससे ज्यादा वोट हासिल कर लेता है तो उसे विजयी घोषित कर दिया जाता है। अगर ऐसा न हो पाए तो प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है। सबसे पहले उस उम्मीदवार को दौड़ से बाहर किया जाता है जिसे पहली गिनती में सबसे कम वोट मिले हों। लेकिन उसे पहली प्राथमिकता देने वाले वोटों में यह देखा जाता है कि दूसरी प्राथमिकता किसे दी गई है। फिर दूसरी प्राथमिकता वाले ये वोट अन्य उम्मीदवारों के खाते में ट्रांसफर कर दिए जाते हैं। इन वोटों के मिल जाने से अगर किसी उम्मीदवार के मत कोटे वाली संख्या के बराबर या ज्यादा हो जाएं तो उस उम्मीदवार को विजयी घोषित कर दिया जाता है।

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