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    लंदन में मिली राजस्थान से चोरी हुई नटराज की मूर्ति

    Published: Thu, 14 Sep 2017 10:04 PM (IST) | Updated: Fri, 15 Sep 2017 12:13 AM (IST)
    By: Editorial Team
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    नई दिल्ली। राजस्थान के बरौली स्थित शिव मंदिर से चोरी हुई नटराज की मूर्ति लंदन में मिली है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) की टीम ने लंदन जाकर मूर्ति की जांच की है। इस जांच में मूर्ति असली पाई गई है। लंदन गई जांच टीम वापस लौट आई है। एएसआइ इस मूर्ति के बारे में रिपोर्ट तैयार कर रही है। जिसे शीघ्र ही विदेश मंत्रालय को सौंपेगी। इसके बाद मूर्ति का लाने की कार्रवाई शुरू हो जाएगी।

    जानकारी के अनुसार यह मूर्ति 1998 में राजस्थान के बरौली के शिव मंदिर से चोरी हो गई थी। इसे इससे पहले भी इसे चुराने का प्रयास किया गया था। उस समय मूर्ति चोरी होने से बच गई थी। मगर मूर्ति का एक पैर टूट गया था। यह मूर्ति 10वीं शताब्दी की बताई जा रही है। इसे लंदन के एक निजी संग्रहालय को बेच दी गई थी। उस संग्रहालय ने नटराज की इस मूर्ति को भारतीय उच्चायोग को वापस कर दिया है।

    एएसआइ के अतिरिक्त महानिदेशक राकेश लाल ने बताया कि बरौली से यह मूर्ति चोरी हुई थी। पुलिस ने पकड़े गए मूर्ति चोरों से पूछताछ में जानकारी जुटाई थी। एएसआइ ने इस संबंध में विदेश मंत्रालय से बात कर निजी संग्रहालय से संपर्क साधा था। यह मूर्ति सैंडस्टोन से बनी है।

    बालू के कणों से बनता है सैंडस्टोन

    बालूकाश्म या बलुआ पत्थर (सैंडस्टोन) ऐसी दृढ़ शिला है जो मुख्यत: बालू के कणों का दबाव पाकर जम जाने से बनती है और किसी योजक पदार्थ से जुड़ी होती है। बालू के समान इसकी रचना में भी अनेक पदार्थ विभिन्न मात्रा में हो सकते हैं, किंतु इसमें अधिकांश स्फटिक ही होते हैं। जिस शिला में बालू के बहुत बड़े -बड़े दाने मिलते हैं, उसे मिश्र पिंडाश्म और जिसमें छोटे-छोटे दाने होते हैं उसे बालूमय शैल या मृण्मय शैल कहते हैं।

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