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    बब्बर शेर के बच्चे को बचाने के लिए 'मां' बना ये डॉक्टर

    Published: Tue, 14 Nov 2017 01:08 PM (IST) | Updated: Wed, 15 Nov 2017 09:36 AM (IST)
    By: Editorial Team
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    जयपुर। शेर का नाम सुनते ही अच्छे-अच्छों की हालत पतली हो जाती है। मगर इस वेटेनरी डॉक्टर को शेर से डर ही नहीं लगता। उलटे इस डॉक्टर ने एक मां की तरह शेर के शावक को पालकर नई मिसाल पेश की है।

    ये वेटेनरी डॉक्टर हैं, एसएस राठौड़, जिन्होंने शेर के शावक को तब से पालना शुरू किया, जब वो एक दिन का था और आज 'कैलाश' नाम का एशियाटिक शेर आज एक साल हो गया है।

    डॉक्टर एसएस राठौड़ की मानें तो शावक इतना कमजोर था कि उसकी मां उसे दूध नहीं पिला पा रही थी। वहीं दो शावकों की इसलिए मौत हो गई थी, क्योंकि शेरनी ने उन्हें गलत तरह से उठाया था। ऐसे में तीसरे शावक 'कैलाश' को बचाने के लिए डॉक्टर ने अनूठा कदम उठाया।

    अमेरिका से मंगाया खास मिल्क पाउडर-

    वेटेनरी डॉक्टर राठौड़ ने इस शावक को मां का एहसास कराने के लिए अपनी शर्ट उतारकर इसे सीने से चिपका लिया, ताकि शावक धड़कन महसूस कर सके। इसके बाद शावक को दूध पिलाने के लिए खास इंतजाम किया गया।

    डॉक्टर राठौड़ ने अमेरिका में बसे अपने दोस्त की मदद से शावक के लिए खास मिल्क पाउडर मंगाया।डॉक्टर राठौड़ का ये नायाब तरीका काम कर गया और धीरे-धीरे शावक दूध पीने लगा और डॉक्टर में ही अपनी 'मां' को ढूंढने लगा।

    इसी बीच शेरनी आरती ने कुछ महीनों बाद दिवाली पर एक नर और मादा शावक को जन्म दिया। नर शावक को जहां रियाज नाम दिया गया, वहीं दिवाली पर पैदा होने की वजह से मादा शावक को लक्ष्मी नाम मिला। पहले दो शावकों को खोने के बाद इस बार प्रबंधन ने खास एहतियात बरती और शुरू से ही रियाज और लक्ष्मी दोनों को बायोलॉजिकल पार्क के अलग-अलग बाड़ों में लोगों से दूर रखा गया।

    एक साल का हो चुका 'कैलाश' 41 हैक्टेयर में फैले जोधपुर के मछिया बायोलॉजिकल पार्क की शान बन गया है। वहीं 'कैलाश' का भाई 'रियाज' भी 6 महीने का हो गया है। हालांकि आंखों में संक्रमण होने की वजह से उसे अलग रखा गया है और पार्क के अस्पताल में ही उसका इलाज किया जा रहा है।

    इससे पहले कैलाश को भी इसी तरह का संक्रमण हो गया था, मगर इलाज के बाद वो पूरी तरह स्वस्थ हो गया है।

    चट्टानें काटकर पार्क में लगे दस हजार पौधे-

    मछिया बायोलॉजिकल पार्क केवल इसी वजह से नहीं पहचाना जा रहा, बल्कि राजस्थान के रेगिस्तान में जिस तरह इस पार्क में हरियाली विकसित की गई है, वो भी एक मिसाल है।

    इस बायोलॉजिकल पार्क में पिछले साल जनवरी में दस हजार पौधे रोपे गए थे और ड्रिप इरीगेशन की मदद से आज सारे हरे-भरे पेड़ के रूप में विकसित हो गए हैं। इन्हें लगाने का तरीका भी बढ़ा नायाब था।

    वन विभाग के असिस्टेंट कन्जर्वेटर भगवान सिंह की मानें तो बायोलॉजिकल पार्क में पत्थरों और चट्टानों को कई फीट काटकर उसमें मिट्टी और खाद डालकर पौधे लगाए गए। जिसमें से ज्यादातर आज जिंदा हैं।

    हरियाली बढ़ने से इस पार्क का औसत तापमान भी तीन से चार डिग्री घटा है। वहीं वन विभाग ने पानी की जरुरतों को पूरा करने के लिए पार्क में 9 स्टॉप डैम भी बनाए हैं। वहीं जल्द ही चेन्नई के वंडालुर जू से यहां बाघ के दो शावक भी आने वाले हैं।

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