Naidunia
    Tuesday, June 27, 2017
    PreviousNext

    ऐसे बन सकते हैं जिंदगी की शतरंज के खिलाड़ी!

    Published: Tue, 21 Mar 2017 10:27 AM (IST) | Updated: Wed, 22 Mar 2017 09:19 AM (IST)
    By: Editorial Team
    version-2 21 03 2017

    - श्री श्री रवि शंकर, आध्यात्मिक गुरु

    खुली सोच की कमी आज हमारे युवाओं के बीच एक बड़ी समस्या है। उनको बहुत चिंता है कि लोग उनके बारे में क्या सोचेंगे। यह गंभीर रूप से उनके निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित करती है।

    मुझे बताया गया कि यूरोप के एक अनुसंधान में पाया गया कि वहां के 70 फीसदी युवा अपने माता पिता से नफरत करते हैं और 80 प्रतिशत अपने प्रोफेसरों से नफरत करते हैं। हिंसा और अपराधमें पड़े हुए युवाओं की संख्या चिंता जनक है।

    धूम्रपान व मादक पदार्थ प्रयोग करने वाले युवाओं की संख्या इस समय अपने शिखर पर है। आज के युवा पहले से कहीं अधिक मानसिक बीमारी, अवसाद और आत्महत्या की प्रवृत्ति से ग्रस्त हैं।

    उत्साह को बढ़ाने के लिए हर युवा तरसता है। इन युवाओं ने पदार्थ सुख और सुविधाओं का चरम सीमा तक अनुभव कर लिया है जिससे अब उनका जीवन इन उत्तेजनाओं के प्रति संतृप्त हो गया है। वास्तव में सिर्फ भौतिक वस्तुएं या सुविधाएं किसी को आराम नहीं दे सकती हैं। हर कोई शांति, स्थिरता, चैन और सच्चे प्रेम के लिए तरस रहा है। आध्यात्मिकता युवाओं को यह दे सकती है।

    युवाओं को सेवा की तरफ मुड़ने के बारे में सोचना चाहिए। जब सेवा जीवन का एकमात्र उद्देश्य होता है, तब उससे भय समाप्त हो जाता है, मन में एकाग्रता आती है, कर्म उद्देश्यपूर्ण हो जाते हैं, और दीर्घकालिक सुख मिलता है।

    हमारा युवा आध्यात्मिकता में सेवा के पहलू को इस्तेमाल करके अपने भय और अवसाद इंसान जीवन में चाहे और कुछ भी पा ले, प्रेम के बिना सब कुछ रीता-सा लगता है।

    इस प्रेम को पाने के लिए वह कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहता है। हमारे किस्से कहानियों में न जाने कितनी ही बार बताया गया है कि प्यार पाने के लिए व्यक्ति किस हद तक जा सकता है। कभी वह पवित्रता की ऊंचाइयों पर जा पहुंचता है, तो कभी छल-कपट का रास्ता चुन बैठता है।

    खुली सोच की कमी आज हमारे युवाओं के बीच एक बड़ी समस्या है। उनको बहुत चिंता है कि लोग उनके बारे में क्या सोचेंगे। यह गंभीर रूप से उनके निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित करती है।

    छोटे-छोटे निर्णय जैसे कौनसे कपड़े पहनने हैं, कौन-सा मोबाइल खरीदनाहै, या गंभीर निर्णय जैसे कौन-सा पेशा चुनना है इनका फैसला इस अदेखे आधार पर किया जाता है कि लोग उनके बारे में क्या सोचेंगे न कि क्या तर्कसंगत है और क्या सही विकल्प होगा।

    श्वास प्रक्रियाएं, ध्यान और साधना के द्वारा युवाओं को इस अंतर बाधित मन को खोलने में मदद मिल सकती है। मन का स्वभाव नकारात्मकता से जुड़े रहने का है।

    इससे मुक्त होने के लिए, युवाओं को स्वयं की जिम्मेदारी लेनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका मन पूर्वग्रहों के साथ नहीं भरा हुआ हो। युक्ति, श्वास, औरसही परिप्रेक्ष्य के द्वारा नकारात्मकता को हटाया जा सकता है। युवाओं के जीवन में असफलता का डर नहीं होना चाहिए।

    बस स्वीकार कर लें-'ठीक है, मैं असफल रहा हूं। तो क्या हुआ? मैं अब भी यह करना चाहता हूं। यह एक खेल की तरह है, चाहे हारे या जीते, तब भी हम खेल खेलते हैं।

    उसी तरह, असफलता से नहीं डरो। अगर तुम असफल हो, कोई बात नहीं, तब भी करते जाओ। जीवन तो असफलता और सफलता का मेल है।

    प्रतिक्रिया दें
    English Hindi Characters remaining


    या निम्न जानकारी पूर्ण करें
    नाम*
    ईमेल*
    Word Verification:*
    Please answer this simple math question.
    +=

      अटपटी-चटपटी