Naidunia
    Wednesday, November 22, 2017
    PreviousNext

    यदि अकेले हैं तो 'अकेलापन' महसूस न करें!

    Published: Fri, 19 May 2017 11:51 AM (IST) | Updated: Sat, 20 May 2017 09:58 AM (IST)
    By: Editorial Team
    akalapan 19 05 2017प्रतीकात्मक चित्र

    - श्री श्री रविशंकर, आध्यात्मिक गुरु

    वास्तव में अकेलेपन को अकेले रहकर ही दूर किया जा सकता है. यदि आप आराम से कुछ समय तक अकेले रह सकते हैं तो आपको अकेलापन नहीं सताएगा और जब आपको अकेलापन नहीं सताता है, तो आप अपने आस-पास खुशियां बिखेर सकते हैं.

    यदि आपको लगता है कि आपको कोई प्रेम नहीं करता, तो यह पक्का जान लें कि आपके ऊपर प्रेम की वर्षा हो रही है. ये धरती आपको प्रेम करती है तभी तो यह आपको धारण किए हुए है. धरती का प्रेम उसकी गुरुत्वाकर्षण शक्ति के रूप में है.

    हवा को भी आपसे प्रेम है तभी तो ये सोते समय भी आपके फेफड़ों तक पहुंचकर आपको जीवन प्रदान करती है. ईश्वर को आपसे अगाध और बहुत गहरा प्रेम है. एक बार यदि आपने इसे जान लिया तो आपको अकेलापन कभी भी नहीं लगेगा.

    किसी दूसरे का साथ आपके अकेलेपन को दूर नहीं कर सकता और यदि कभी इससे अकेलापन मिटता भी है तो बहुत थोड़े समय के लिए. आप किसी के साथ रहते हुए भी अकेला महसूस कर सकते हैं. वास्तव में अकेलेपन को अकेले रहकर ही दूर किया जा सकता है.

    यदि आप आराम से कुछ समय तक अकेले रह सकते हैं तो आपको अकेलापन नहीं सताएगा और जब आपको अकेलापन नहीं सताता है, तो आप अपने आस-पास खुशियां बिखेर सकते हैं.

    लोग पार्टियों और समारोहों के पीछे भागते हैं, परंतु जो लोग उनके पीछे नहीं भागते उनके पीछे उत्सव भाग आता है. यदि आप पार्टी या समारोहों की ओर भागते हैं, तब अकेलापन आपके पास आ जाता है.

    यदि आप अपने में रहने का आनंद लेते हैं तो आपका व्यक्तित्व उबाऊ नहीं होगा, पर यदि आपमें अकेलापन है तो आप दूसरों के लिए उबाऊ हो सकते हैं और यह बात आपको और भी अकेलेपन मेंला देगी!

    यदि आपको स्वयं का साथ उबाऊ लगता है, तो जरा सोचिए कि आप दूसरे लोगों के लिए कितने उबाऊ होंगे? जिन लोगों के पास हमेशा किसी न किसी का साथ होता है, वह अकेले रहने का सुख उठाना चाहते हैं और जो लोग एकाकी रहते हैं वे अकेलापन महसूस करते हैं और किसी का साथ ढूंढते हैं.

    हर एक व्यक्ति पूर्ण संतुलन की तलाश में है. यह पूर्ण संतुलन एक उस्तरे की धार के संतुलन जैसा है और उसे सिर्फ आत्मा में ही पाया जा सकता है. यदि हम वर्ष में एक सप्ताह ही अपने स्वयं के साथ रहने के लिए बाहर निकलें और अपने विचारों एवं भावनाओं को देखें तो समझ पाएंगे कि वास्तव में शांति का मतलब क्या होता है.

    कुछ समय केवल हमें अपने आपके लिए निकालना चाहिए और समय-समय पर जो हमारे करीब हैं उन लोगों से हमें कुछ दूरी बनाकर रखनी चाहिए. सुबह से रात तक हम लोगों से घिरे रहते हैं और मन में सांसारिक विचार चलते रहते हैं इसलिए हम कुछ समय एकांत में बैठें और अपने हृदय की गहराइयों में प्रवेश करें.

    इससे हमें एकाकी रहने पर भी अकेलेपन का एहसास नहीं होगा. अपना जीवन अच्छे से जीएं. यदि हम अपने पूरे जीवन काल में लोगों के लिए उपयोगी होते हैं तो हमारी देखभाल करने के लिए हजारों और लाखों लोग होंगे.

    उदाहरण के तौर पर हम देख सकते हैं कि मदर टेरेसा और आचार्य विनोबा भावे काफी समय बीमार रहे. उनकी देखभाल करने के लिए सैकड़ों लोग खड़े थे क्योंकि वे अपने आस-पास के लोगों के लिए हमेशा उपयोगी रहे.

    हमें अपनी सीमाओं के कारण परेशानी होती है

    जब हम नाखुश, दुखी या अकेले होते हैं तो हम अपनी सीमाओं से परिचित होते हैं. ये हमारी सीमाएं और हदें ही हैं, जिनके कारण हम वास्तव में परेशान रहते हैं. जब तक हम अपनी सीमाओं के संपर्क में नहीं आ जाते, तब तक हम शांत और सुखी होते हैं.

    इनके संपर्क में आने से हमारा मन मचलने लगता है और हम अपने केंद्र से बाहर निकल जाते हैं. उस क्षण हम तुरंत कृतज्ञ हो जाएं और शांति के लिए प्रार्थना करें.

    प्रतिक्रिया दें
    English Hindi Characters remaining


    या निम्न जानकारी पूर्ण करें
    नाम*
    ईमेल*
    Word Verification:*
    Please answer this simple math question.
    +=

      जरूर पढ़ें