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    आपके अंदर है असीम आनंद, इसे परमानंद में ऐसे बदलें

    Published: Sat, 15 Apr 2017 04:54 PM (IST) | Updated: Mon, 17 Apr 2017 09:23 AM (IST)
    By: Editorial Team
    happines34 15 04 2017

    - स्वामी सुखबोधानंद

    अगर आप लगातार सकारात्मक प्रयास नहीं करते हैं तो नकारात्मक शक्ति सारी चीजों को अपने नियंत्रण में ले लेती है।

    तनाव के दो स्रोत हैं- आंतरिक और बाह्य। आंतरिक स्रोत में विचार, जीवन मूल्य, विश्वास और दृष्टिकोण हैं। बाह्य स्रोतों में गलत ढंग से एक्ससाइज, श्वास लेना, खराब खानपान, प्रदूषण और नींद की कमी आदि चीजें रखी जा सकती हैं।

    कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में तनाव से बच नहीं सकता है। हमारी कोशिश बस यही होना चाहिए कि हम तनाव को न्यूनतम कैसे रखें। हमें भीतरी और बाहरी दोनों ही तनाव के कारणों पर काबू करने की जरूरत है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण यही है कि हम जीवन को किस तरह देखें।

    एक बार एक कार्यक्रम खत्म होने पर एक लड़की तीन घंटे तक डांस करती रही। फिर वह मेरे पास आई और बोली कि वह कितना ज्यादा खुश है। फिर उसने पीने के लिए कॉफी उठाई और उसका कुछ अंश उसके कपड़ों पर गिर गया।

    तुरंत वह चिल्लाई कि तीन घंटे का उसका जो आनंद था वह चला गया। इस घटना को देखकर मैंने जाना कि तीन घंटे के आनंद को कुछ सेकंड में घटी कोई चीज खत्म कर सकती है।

    अगर हमारा मन इस तरह से काम करता है तो सोचिए कि इसका उलटा भी संभव है। तीन घंटे का दुख कुछ सेकंड के आनंद से खत्म हो जाना चाहिए।

    जिंदगी में खुश रहने का राज यही है कि हम खुश रहने वाले पलों का इकट्ठा करना सीखें। दुख देने वाली चीजों से खुद को दूर रखें।

    क्या आप अपनी जिंदगी में इन चीजों को आजमा सकते हैं। अपने मन को समझिए, उसे बदलिए और उससे पार निकलिए। मन को बदलने का मतलब यह जानना है कि जीवन में परम संतुष्टि कभी नहीं है।

    आप मौजूदा स्थिति से बेहतर स्थिति की ओर जा सकते हैं। खुश रहने के लिए यह जरूरी नहीं है कि हम हर बार जीत हासिल करें। खुशी सफलता पर ही निर्भर नहीं करती।

    जिंदगी में जो भी चीजें होती हैं उन पर काम कीजिए उन पर प्रतिक्रिया मत दीजिए। अगर हम चीजों पर प्रतिक्रिया करेंगे तो हमारी वही आदत हो जाएगी। तब अहम पैदा हो जाएगा।

    एक कुत्ते और बिल्ली के बीच बड़ी रोचक बातचीत होती है। कुत्ता कहता है, मैं बहुत भाग्यशाली हूं कि मालिक मुझे खाना खिलाता है और घर के सभी बच्चे मुझसे प्यार करते हैं। इसलिए मुझे लगता है कि वे भगवान हैं। यह सुनकर बिल्ली भी कहती है, 'मालिक मेरा भी पालन करता है। बच्चे मुझे प्यार करते हैं। सभी नौकर-चाकर मेरा खास ध्यान रखते हैं तो मुझे लगता है कि मैं ही भगवान हूं।

    हमें 'लॉ ऑफ थ्री को समझने की जरूरत है। यह कहता है कि जब आप किसी चीज में सकारात्मक प्रयास करते हो तो वह पहली शक्ति होती है। इसके फलस्वरूप एक नकारात्मक शक्ति पैदा होती है जो सकारात्मक शक्ति को प्रभावित करती है।

    नकारात्मक शक्ति दूसरी शक्ति हुई। अगर कोई लगातार सकारात्मक शक्ति लगाता रहे तो एक तीसरी शक्ति पैदा होती है जो नकारात्मक शक्ति को भी सकारात्मक शक्ति में बदल देती है। यह लॉ ऑफ थ्री है।

    अगर आप लगातार सकारात्मक प्रयास नहीं करते हैं तो नकारात्मक शक्ति सारी चीजों को अपने नियंत्रण में ले लेती है। तो यह नियम हमें यही कहता है कि जीवन में हमेशा सकारात्मक प्रयास करते रहो।

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