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    जानें, गोदभराई की रस्म के दौरान किए जाने वाले 'अन्न विधान' के बारे में

    Published: Thu, 12 Oct 2017 04:52 PM (IST) | Updated: Fri, 13 Oct 2017 12:34 PM (IST)
    By: Editorial Team
    baby shower news 11 10 17 12 10 2017

    मल्टीमीडिया डेस्क। भारत में गर्भावस्था को बहुत भव्यता के साथ मनाया जाता है। लगभग सभी धर्मों में गर्भावस्था तथा बच्चे के आगमन पर खुशियां मनाने के लिए भव्य पार्टी तथा रीति-रिवाज से पूजन करने का विधान होता है। सामान्यतः इस पूजा को गोद भराई या प्रचलित रुप में बेबी शॉवर कहा जाता है।

    गोद भराई हमारी परंपरा तथा संस्कृति का हिस्सा है। जिससे परिवार में आने वाले नए मेहमान तथा उसकी मां का स्वागत किया जाता है। इस त्योहार में पूजा पाठ के साथ ही उपहारों को गर्भवती मां को प्रदान किया जाता है। जिसमें नजदीकी रिश्तेदार के साथ परिवार के लोग सम्मिलित होते हैं। भारत के विभिन्न भागों में इसे अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है।

    उत्तर भारत-

    लगभग सभी राज्यों में गोद भराई को मिलते जुलते तरीके से ही मनाते हैं लेकिन उत्तर भारत में इस दिन मां को नये कपड़े पहनाकर, गहनों तथा फूलों से श्रृंगार करके घर के मुख्य द्वार के बाहर बैठाते हैं। इसके बाद जब वह मां घर में प्रवेश करती है तो घर की अन्य महिलाएं मांगलिक गीत गाकर उसका स्वागत करती हैं। इसके ठीक बाद विवाहित महिलाऐं उसके माथे पर तिलक लगाकर स्वस्थ बच्चे के लिए आशीर्वाद देती हैं।

    इसके बाद पूजा विधान का पालन किया जाता है। जिसमें महिला को मिठाईयां, फल तथा उपहार प्रदान किया जाता है। गर्भवती महिला को केसर मिश्रित दुध का एक ग्लास दिया जाता है तथा मां के हाथ में अभिमंत्रित एक धागा भी बाधा जाता है। जिससे बुरी शक्तियां उससे दूर रहें।

    तमिलनाडु- सेमंडम-

    तमिलनाडु में सेमांदम नाम का एक समारोह महिला के गर्भवती होने के पांचवें, सातवें या नौवें माह में आयोजित किया जाता है। इस समारोह में केवल विवाहित महिलाओं ही मां बनने वाली महिला को आशीर्वाद देने के लिए आमंत्रित किया जाता है। गर्भवती महिला को अपने ससुराल वालों द्वारा एक नई साड़ी भेंट की जाती है। जिसे पहनाकर उसके हाथों तथा चेहरे पर हल्दी का लेप लगाया जाता है। इसके बाद उसे तैयार कर उसके बालों को फूलों से सजाया जाता है। इसके बाद बच्चे की सुरक्षा के लिए मंत्र का जाप किया जाता है।

    महाराष्ट्र- दोहले जीवन

    गर्भावस्था के सातवें या नवें माह में मराठी परिवार में दोहाले जीवन नाम का आयोजन मराठी परिवारों में होता है। दोहाले का शाब्दिक अर्थ कुछ खाद्य पदार्थ प्राप्त करने की लालसा होता है। इस समारोह में गर्भवती मां को उसकी इच्छा के अनुसार भोजन करने की इच्छा को पूरा किया जाता है।

    इस अवसर पर गर्भवती मां को फूलों के हार की माला को पहनाया जाता है। उसे घर के पुजा मंदिर के पास बैठाकर पौष्टिक खाद्य पदार्थो से भरी थालियों को रखा जाता है। इस थालियों में खाद्य पदाथों के साथ फल मेंवें भी होते हैं। जिसे एक काले कपड़ो से ढका जाता है। जिससे कोई भी यह देखने में असमर्थ हो जाता है कि अंदर क्या है।

    इसके बाद महिला को किसी एक थाली को छूने के लिए बोला जाता है जिसे बाद में परिवार के सभी लोगों को बताया जाता है कि इस थाली में यह खाद्य पदार्थ था। इस खाद्य पदार्थ से सभी लोग होने वाले शिशु के लिंग का अनुमान लगाते हैं। मराठी में लगभग सभी खाद्य पदार्थों को उनके लिंग के अनुसार जाना जाता है।

    बंगाल - स्वाद-

    बंगाल में गर्भवती महिला को बंगाली खाद्य पदार्थों को खिलाने के साथ ही पूजा की जाती है। महिला की पूजा के लिए आयोजित होने वाले अनुष्ठान में मां की इच्छाओं की पूर्ति की जाती है। गर्भवती महिला को उसकी सास के द्वारा नये कपड़े दिये जाते हैं। जिसे पहनाकर उसे पुजा के लिए तैयार किया जाता है।

    बंगाली परंपरा के अनुसार मछली तथा भात ( चावल) महिला को दिया जाता है। जिसे मछली के सिर को चावल के साथ एक बड़ी चांदी की थाली में परोसा जाता है। इसके अलावा उसे मंत्र तथा पूजा पाठ के द्वारा सुरक्षा प्रदान की जाती है। जिससे महिला तथा बच्चा दोनों सुरक्षित रहें।

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