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    ये हैं वो वजह, जिसके कारण विलुप्त हो रहीं गौरेया

    Published: Mon, 20 Mar 2017 10:36 AM (IST) | Updated: Tue, 21 Mar 2017 09:19 AM (IST)
    By: Editorial Team
    sparrow 20 03 2017

    विश्व गौरेया दिवस 20 मार्च विशेष...

    गौरेया एक पक्षी है जो यूरोप और एशिया में पाया जाता है। गोरैया एक छोटी चिड़िया है। यह हल्की भूरे रंग या सफेद रंग में होती है। इसके शरीर पर छोटे-छोटे पंख और पीली चोंच व पैरों का रंग पीला होता है। लेकिन यह विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गई है।

    गौरेया के विलुप्त होने की वजह मनुष्य ही है, जिसने लंबे-लंबे मोबाइल टावर खड़े किए, जिनमें से निकलने वाली रेडियोएक्टिव तरंगें गौरेया के मस्तिष्क को हानि पहुंचाती है। आलम यह होता है कि कुछ दिनों बाद गौरेया की मृत्यु हो जाती है। यह सिलसिला मोबाइल क्रांति आने से शुरु हुआ है।

    इसीलिए विश्व गौरैया दिवस हर वर्ष '20 मार्च' को मनाया जाता है। यह दिवस पूरी दुनिया में गौरैया पक्षी के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए मनाया जाता है।

    कैसी होती है गौरेया: नर गोरैया का पहचान उसके गले के पास काले धब्बे से होता है। मादा के सिर और गले पर भूरा रंग नहीं होता है। यह चिड़िया मनुष्य के बनाए हुए घरों के आसपास रहना पसंद करती है।

    गौरेया के विलुप्त होने के कारण

    - भोजन और जल की कमी के साथ ही गौरेया को घोसलें बनाने के लिए विशेष तौर पर शहरों में पेड़ कम मिलते हैं।

    - गौरैया के बच्चों का भोजन शुरूआती 10-15 दिनों में सिर्फ कीड़े-मकोड़े ही होते है, लेकिन आजकल लोग खेतों से लेकर अपने गमले के पेड़-पौधों में भी रासायनिक पदार्थों का उपयोग करते हैं, जिससे ना तो पौधों को कीड़े लगते हैं। ऐसे में लोग बहुत ज्यादा स्तर पर खेतों में रासायनिक तत्वों का छिड़काव करते हैं। तो उन्हें उनके बच्चों को पर्याप्त भोजन नहीं मिल पाता। यह समस्या गौरेया ही नहीं अन्य पक्षियों के साथ भी है।

    - मोबाइल फोन तथा मोबाइल टावरों से निकलने वाली सूक्ष्म तरंगें गौरैया के अस्तित्व के लिए खतरा बन रही हैं।

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