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    सचमुच में थे इंसान की शक्ल के घोड़े, यह हैं प्रमाण

    Published: Thu, 20 Apr 2017 10:21 AM (IST) | Updated: Fri, 21 Apr 2017 10:24 AM (IST)
    By: Editorial Team
    horsemenk 2017421 10244 20 04 2017

    दुनिया भर के प्राचीन धर्म ग्रंथ रहस्यों का वो खजाना है जो हमेशा अपनी कहानियों को जीवित रखेंगे। इन ग्रंथों में मौजूद कई कहानियां ऐसी हैं जो दिलचस्प हैं। जैसे किसी घोड़े का सिर इंसान का होना या फिर किसी इंसान का सिर घोड़े का होना।

    शुरूआत ब्रह्मांड से की जाए तो आकाश में पर्णिन अश्व या पॅगासस एक तरह का तारामंडल है जो पृथ्वी के उत्तरी भाग से आकाश में नजर आता है। प्राचीन खगोलशास्‍त्रीय पुस्तकों में इसे अक्सर एक परों वाले घोड़े के रूप में दर्शाया जाता था।

    प्राचीन यूनानी कथाओं में पॅगासस एक पंखदार उड़ने वाला घोड़ा था। संस्कृत में पर्ण का मतलब पंख या पत्ता होता है, पर्णिन का अर्थ पंखवाला होता है और अश्व का का अर्थ घोड़ा होता है। ज्योतिषीय ग्रंथों में वर्णित है कि इस तारामंडल को हयशिर का भी नाम दिया है, जो रामायण में चर्चित एक दिव्यास्त्र का नाम था।

    ठीक इसी तरह ईसाई धर्म से संबंध रखने वाले सांता क्लोज, चौथी सदी के एक ग्रीक ईसाई बिशप थे। कुछ परंपराओं के अनुसार, वह अपने बूट्स में गाजर, पुआल, या चीनी भरकर ओडिन नाम के उड़ने वाले घोड़े से यात्रा किया करते थे।

    हिंदू पौराणिक ग्रंथों में उल्लेखित है कि समुद्र मंथन के दौरान उच्चैःश्रवा घोड़े की भी उत्पत्ति हुई थी। घोड़े तो कई हुए लेकिन श्वेत रंग का उच्चैःश्रवा घोड़ा सबसे तेज और उड़ने वाला घोड़ा माना जाता था।

    यह इंद्र के पास था। उच्चै:श्रवा का पोषण अमृत से होता है। यह अश्वों का राजा है। उच्चै:श्रवा के कई अर्थ हैं, जिसका यश ऊंचा हो, जिसके कान ऊंचे हों अथवा जो ऊंचा सुनता हो।

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