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    मनुष्य को जगाने के लिए प्रकृति ने दिए हैं ये 2 आलार्म

    Published: Wed, 19 Apr 2017 10:16 AM (IST) | Updated: Thu, 20 Apr 2017 10:24 AM (IST)
    By: Editorial Team
    cockv 19 04 2017

    प्रकृति ने हमें सब कुछ दिया है, लेकिन हमने प्रकृति की ओर ध्यान ही नहीं दिया। प्रकृति ने हमें सुबह जागने का अलार्म भी दिया है।

    यह अलार्म स्वयं मनुष्य को जगाने के लिए मौजूद रहते थे। लेकिन हमने इन्हें भी विलुप्ति की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है।

    प्रकृति में मौजूद प्राकृतिक अलार्म में मुर्गे की बांग, कोयल की कूक और गौरेया की चहचहाहट को शामिल किया जाता रहा है। ये सदियों से मनुष्य को जगाने का कार्य कर रहे हैं।

    प्राचीन ऋषि मुनि तो मुर्गे की बांग और चिड़ियों की चहचहाहट से ही जाग जाया करते थे। इस बात का उल्लेख रामायण में मिलता है।

    रामायण की एक कहानी के अनुसार सूर्य उदय से पहले ऋषि गौतम स्नान के लिए सरयू नदी में जाया करते थे। ऋषि गौतम उन्हीं देवी अहिल्या के पति थे। जो भगवान श्रीराक के चरण का स्पर्श पाकर अहिल्या पत्थर से पुनः इंसान बनीं थीं।

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