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    जानिए माता पार्वती क्यों हो गई थीं शिवजी की बहन से परेशान

    Published: Mon, 17 Jul 2017 10:52 PM (IST) | Updated: Tue, 18 Jul 2017 08:13 AM (IST)
    By: Editorial Team
    lord shiva sister 17 07 2017

    श्रावण के इस पावन माह में आज हम भगवान शिव से जुड़ी एक ऐसी बात आपको बताएंगे जिसे सुनकर आप भी चौंक जाएंगे। हमने शिवपुराण, पौराणिक कथाओं और शास्त्रों से अबतक यही जाना था कि शिव परिवार में स्वयं देवाधिदेव महादेव के अलावा माता पार्वती और उनके दो पुत्र बड़े श्री कार्तिकेय और छोटे गणेश ही थे। लेकिन क्या आपको पता है कि भगवान शिव की एक बहन भी थी।

    जी हां। पौराणिक कथा के अनुसार जब माता पार्वती, भगवान शिव से विवाह कर कैलाश पर्वत पर आईं, तब वे कई बार उदास और अकेला महसूस करती थीं। अंतर्यामी शिव को माता पार्वती का मन पढ़ने में कतई विलंब नहीं हुआ। लेकिन फिर भी उन्होंने पार्वती जी से उदासी का कारण पूछा तो माता पार्वती ने उनसे कहा कि उन्हें एक ननद चाहिए।

    माता पार्वती अपनी इच्छा बताते हुए शिव जी से बोली 'काश मेरी कोई ननद होती', आपकी लंबी साधनाओं और ध्यान के दौरान जिससे मेरा मन लगा रहता। ये सुनते ही भगवान शिव ने उनसे लिया कि क्या आप ननद के साथ रिश्ता निभा पाओगी? ये सुनते ही माता पार्वती ने तनिक भी समय व्यतीत न करते हुए कहा 'ननद से मेरी क्यों नहीं बनेगी'।

    भगवान शिव ने उनसे कहा, 'ठीक है, मैं तुम्हें एक ननद लाकर देता हूं'। भोलेनाथ ने अपनी माया से एक स्त्री को उत्पन्न किया। वह स्त्री बहुत मोटी और भद्दी थी, उसके पैर भी फटे हुए थे।

    भगवान शिव ने देवी पार्वती से कहा, 'ये लो देवी, आ गई तुम्हारी ननद, इनका नाम असावरी देवी है'। ननद की खुशी में माता पार्वती उनकी खातिरदारी में जुट गई और उनके लिए जल्दी-जल्दी भोजन का प्रबंध करने लगीं।

    असावरी देवी ने स्नान के पश्चात भोजन की मांग की तो देवी पार्वती ने स्वादिष्ट भोजन उनके सामने परोस दिया। असावरी देवी सारा भोजन चट कर गईं और सारा अन्न भी खा गईं। इस बीच असावरी देवी को शरारत सूझी, उन्होंने देवी पार्वती को अपने फटे पांव की दरारों में छिपा लिया, जहां उनका दम घुटने लगा।

    असावरी देवी मुस्कुराने लगीं और पार्वतीजी को अपने पैरों की दरारों से आजाद किया। ननद की ऐसी अठखेलियों से माता पार्वती जल्द ही परेशान हो चुकी थीं। आजाद होते ही पार्वती माता ने कहा, 'प्रभु, कृपा कर ननद को अपने ससुराल भेज दें, अब और धैर्य नहीं रखा जाता।

    भगवान शिव ने जल्द ही असावरी देवी को कैलाश पर्वत से विदा किया। इस घटना के बाद से सी ननद-भाभी के बीच छोटी-छोटी तकरार और नोंक-झोंक का सिलसिला प्रारंभ हुआ।

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