Naidunia
    Saturday, December 16, 2017
    PreviousNext

    क्या आप जानते थे महाभारत का यह राज? पांडवों के साथ हुआ था ऐसा

    Published: Tue, 08 Aug 2017 04:43 PM (IST) | Updated: Tue, 22 Aug 2017 11:57 AM (IST)
    By: Editorial Team
    mahabharat war 08 08 2017

    मल्टीमीडिया डेस्क। यह तो सभी जानते हैं कि यदि श्रीकृष्ण पांडवों के साथ नहीं होते, तो उनका महाभारत का युद्ध जीतना मुश्किल होता। संभव है कि पांडव परिजनों पर हथियार उठाने की बजाय राज पाट छोड़ने को ही तैयार हो जाते। मगर, श्रीकृष्ण ने गीता का ज्ञान देकर आने वाली पीढ़ियों के समक्ष कर्म का मार्ग प्रशस्त किया।

    पांडवों के साथ वासुदेव के अलावा दो अन्य भगवान भी साथ में थे, जिन्होंने धर्मयुद्ध में पांडवों का पक्ष लिया। इनमें से एक हैं हनुमान जी, जो युद्ध में अर्जुन के रथ की ध्वजा में विराजमान हुए और अंत तक विभिन्न अस्त्रों और शस्त्रों से उनकी रक्षा की।

    युद्ध के बाद आखिरी दिन कृष्ण ने सबसे पहले अर्जुन को रथ से उतरने को कहा। उसके बाद नंदलाल रथ से उतरे और उन्होंने हनुमानजी का धन्यवाद किया कि उन्होंने उनकी रक्षा की। मगर, जैसे ही अर्जुन के रथ से हनुमान उतरे, वैसे ही वह जलने लगा। यह देखकर अर्जुन हैरान रह गए। तब श्रीकृष्ण ने उन्हें बाताया कि हनुमानजी दिव्यास्त्रों से कैसे उनकी रक्षा कर रहे थे।

    इसके अलावा अर्जुन ने शक्ति साधना के जरिये वरदान हासिल किया और अपनी विजय का मार्ग प्रशस्त किया गया। अर्जुन और श्रीकृष्ण ने उज्जैन में हरसिद्ध माता और नलखेड़ा में बगलामुखी माता का पूजन भी किया था। वहां उन्हें युद्ध में विजयी होने का वरदान मिला था।

    कहा तो यह भी जाता है कि महाभारत से एक रात पहले अर्जुन ने माता दुर्गा की आराधना की थी। उन्होंने विजयी होने का वरदान देते हुए कहा था कि जहां धर्म होगा, वहीं श्रीकृष्ण होंगे और जहां वे होंगे, वहां विजय होगी।

    प्रतिक्रिया दें
    English Hindi Characters remaining


    या निम्न जानकारी पूर्ण करें
    नाम*
    ईमेल*
    Word Verification:*
    Please answer this simple math question.
    +=

      जरूर पढ़ें