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    तो क्या सदियों पहले थे 1000 फन के नाग!

    Published: Sat, 10 Jun 2017 10:15 AM (IST) | Updated: Tue, 13 Jun 2017 11:31 AM (IST)
    By: Editorial Team
    nagji 10 06 2017

    यह पौराणिक कहानी है कलियुग के आरंभ के समय की, उस समय राजा परिक्षित ने वन में मिले मरे सांप को तपस्यारत शमीक ऋर्षि के गले में डाल दिया था। इससे ऋर्षि क्रोधित हो गए और उन्होंने राजा को श्राप दिया कि 7 दिन में तक्षक नाग के डसने के कारण उनकी मृत्यु हो जाएगी।

    प्रतिशोध के कारण नजेयज ने नागदाह यज्ञ किया जिसके चलते एक एक करके सांप उस यज्ञ की आहुति में जलने लगे। लेकिन आस्ति मुनि ने पंचमी के दिन आकर नागवंश की रक्षा की इसी कारण नागपंचमी के दिन नागों की पूजा की जाती है।

    एक हजार फन वाले नाग

    शास्त्रों में 500 प्रकार के नागों का उल्लेख है। इनमें से सबसे पहले शेषनाग की उत्पत्नि हुई जिसके एक हजार फन हैं। शेषनाग के साथ ही 26 नाग हैं जिनके एक हजार फन होते हैं।

    इन नागों में शेषनाग, वासुकि, कर्कोटक, शंख, ऐरावत, कम्बल, धनंजय, महानील, अश्वतर, पद्म, तक्षक, एलापर्ण, महामद्म, धृतराष्ट्र, बलाहक, शंखपाल, महाशंख, पुष्पदंष्ट्र, शंकुरोम, बहुल, वामन, पाणिनी, कपिल, दुर्मुख व पतंजलि हैं।

    नागों से जुड़े हैं त्रिदेव

    नागों से न केवल नवग्रह बल्कि त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और शंकर भी जुड़े हुए हैं। ब्रह्मा के आदेश पर ही शेषनाग ने अपने मस्तक पर धरती धारण की व भगवान विष्णु शेष शैय्या पर विश्राम करते हैं।

    सूर्य मंडल के चारों और हजारों किलोमीटर लंबी सूर्य ज्वालाएं लहरों की तरह सर्पिल आकार में दिखाई देती हैं। जिनकी तीव्रता नागों की तरह है। इसके अलावा नवग्रहों का अष्ट नागों से संबंध बताया गया है।

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