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    जब भक्त के लिए प्रभु जगन्नाथ बने श्री गणेश

    Published: Thu, 17 Sep 2015 11:58 AM (IST) | Updated: Thu, 17 Sep 2015 05:22 PM (IST)
    By: Editorial Team
    lordjagnathganash 2015917 122034 17 09 2015

    भक्त वत्सल्य भगवान श्री गणेश के बारे में कई पौराणिक कथाएं वर्णित हैं। इन्हीं में से एक है भगवान जगन्नाथ की कथा, जिसमें प्रभु जगन्नाथ ने श्री गणेश जी का रूप धारण कर भक्त को दर्शन दिए थे।

    पौराणिक ग्रंथों के अनुसार 16वीं शताब्दी में महाराष्ट्र के एक गांव में गणेश भक्त गणपति भट्ट रहते थे। वह हमेशा दिन-रात गणेश जी (बाप्पा) की भक्ति में लीन रहते थे। एक समय वह तीर्थ यात्रा पर निकले। चारों धाम की यात्रा के दौरान जब वह पुरी( ओडिशा) पहुंचे।

    भट्ट जी ने जब पुरी में गणेश मंदिर का कोई भी मंदिर नहीं देखा तो वह विचलित हो गए। वह बाप्पा की भक्ति में इतने मग्न थे कि भगवान जगन्नाथ के मंदिर में बिना दर्शन किए ही पुरी की यात्रा छोड़ चार धाम यात्रा से लौट आए।

    थोड़ा आगे पहुंचकर उन्होंने गणेश मंदिर तराशने का काम शुरु कर दिया। पुरी आने के बाद उन्होंने नारायण प्रसाद भी ग्रहण करना उचित नहीं समझा।

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    वह मंदिर को तराशने का काम कर ही रहे थे कि अचानक एक तेजस्वी ब्रह्मण ने उनके पास आकर कहा, 'गणपति भट्ट जी प्रभु जगन्नाथ भक्त की कामना से अपना स्वरूप बदल कर भी दर्शन देते हैं। आपने भगवान जगन्नाथ के समक्ष पहुंचकर बाप्पा का स्मरण क्यों नहीं किया।' यह कहकर वह तेजस्वी ब्रह्मण चला गया।

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    गणपति भट्ट हैरान थे। यह बात उनके मन में क्यों नहीं आई। जरूर बाप्पा ने उनका मार्गदर्शन किया है। वे तुरंत पुरी स्थित जगन्नाथ धाम पहुंचे। उस दिन ज्येष्ठ पूर्णिमा थी। गणपति भट्ट ने वहां पहुंचकर गणेश स्तुति की। तब उनके सामने स्वयं भगवान जगन्नाथ गणेश जी के रूप में प्रकट हुए।

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