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    कीजिए उस रहमदिल अल्लाह का तहेदिल से शुक्रिया

    Published: Fri, 10 Apr 2015 11:52 AM (IST) | Updated: Tue, 18 Apr 2017 10:43 AM (IST)
    By: Editorial Team
    namaz 2015410 131152 10 04 2015

    शेख सादी मस्जिद में नमाज पढ़ने जा रहे थे। इतने में उन्होंने देखा कि एक अमीर वहां नमाज पढ़ने आया है और उसके पैरों में हीरे-जवाहरात जड़ी जूतियां हैं। उन्हें यह भी पता चला कि वह अमीर साल में एक बार ही नमाज पढ़ने आता है।

    शेख सादी मन ही मन बोले, 'हे अल्लाह! मैं रोज नमाज पढ़ता हूं, किंतू मेरे पास फटी-पुरानी जूतियां हैं। यह अमीर इंसान साल में एक ही बार नमाज पढ़ता है, लेकिन इसके पास रत्न जड़ित जूतियां हैं। यह कैसा न्याय है?'

    शेख सादी यह सोच ही रहे थे कि वहां एक अपाहिज भी नमाज पढ़ने आ गया। उसके दोनों पैर नहीं थे, लेकिन उसने रोज नमाज अदा करने में कभी कोताही नहीं की। यह देखकर शेख सादी ने तुरंत अल्लाह का शुक्र अदा करते हुए कहा, मुझ पर अल्लाह ने क्या कम इनायत की है, जो मुझे अल्लाह के दर तक आने के लिए दो सही-सलामत पैर दिए हैं।

    संक्षेप में

    इंसान को ईश्वर के प्रति सदैव आभारी रहना चाहिए। क्योंकि ईश्वर ने इंसान को भले ही धन-दौलत न दी हो, लेकिन उसे स्वस्थ्य शरीर और एक शक्तिशाली मस्तिष्क दिया है। जिसके जरिए वह अकूत संपदा हासिल कर सकता है।

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