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    सचमुच! हम एक दूसरे से टकराए थे और हमें माफी मांगनी चाहिए

    Published: Fri, 14 Jul 2017 11:24 AM (IST) | Updated: Fri, 14 Jul 2017 11:27 AM (IST)
    By: Editorial Team
    drjakirhussen 14 07 2017

    बात उस समय की है जब डॉ. जाकिर हुसैन जब विशेष अध्ययन के लिए जर्मनी गए हुए थे। वहां कोई भी अनजान व्यक्ति दूसरे अनजान को देखकर अपना नाम बताते हुए हाथ आगे बढ़ा देता था। इस प्रकार अपरिचित लोग भी एक दूसरे के दोस्त बन जाते थे। दोस्ती करने का यह रिवाज वहां काफी लोकप्रिय था।

    एक दिन जाकिर हुसैन कॉलेज में वार्षिकोत्सव मनाया जा रहा था। कार्यक्रम का समय हो चुका था। सभी विद्यार्थी व शिक्षक वार्षिकोत्सव के लिए निर्धारित स्थल पर पहुंच रहे थे। जाकिर साहब भी जल्दी-जल्दी वहां जाने के लिए अपने कदम बढ़ा रहे थे। जैसे ही उन्होंने कॉलेज में प्रवेश किया, एक शिक्षक महोदय भी वहां पहुंचे। दोनों ही जल्दबाजी और अनजाने में एक-दूसरे से टकरा गए।

    शिक्षक महोदय जाकिर साहब से टक्कर होने पर गुस्से से उन्हें देखते हुए बोले, 'ईडियट।' यह सुनकर जाकिर साहब ने फौरन अपना हाथ आगे की ओर बढ़ाया और बोले, 'जाकिर हुसैन। भारत से यहां पढ़ने के लिए आया हुआ हूं।'

    जाकिर साहब की हाजिरजवाबी देखकर शिक्षक महोदय का गुस्सा मुस्कराहट में बदल गया। वह बोले, 'बहुत खूब। आपकी हाजिरजवाबी ने मुझे प्रभावित कर दिया। इस तरह परिचय देकर आपने हमारे देश के रिवाज को भी मान दिया है और साथ ही मुझे मेरी गलती का अहसास भी करा दिया है।

    वाकई हम अनजाने में एक-दूसरे से टकराए थे। ऐसे में मुझे क्षमा मांगनी चाहिए थी। अपशब्द नहीं बोलने चाहिए थे।'

    संक्षेप में

    विनम्र बनिए आपकी आधी समस्याएं यूं ही ठीक हो जाएंगी।

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