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    तो क्या इसीलिए होता है पति-पत्नी में झगड़ा

    Published: Mon, 08 Aug 2016 10:20 AM (IST) | Updated: Tue, 21 Mar 2017 03:21 PM (IST)
    By: Editorial Team
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    अमूमन देखा जाता है कि पति-पत्नी में झगड़े होते हैं। ऐसा तब होता है जब आपस में तालमेल नहीं रख पाना और ईगो रहता है। ये कारण बहुत अधिक होते हैं।

    लेकिन इनको दूर करने का सबसे अच्छा उपाय है कि दंपत्ति ज्यादा से ज्यादा समय साथ बिताएं । इससे आपसी संबंध मधुर हो सकते हैं।

    मनोवैज्ञानिक अध्ययन कहता है कि, 'आपसी तालमेल नहीं होने के कारण लड़ाई-झगड़े होते हैं।' वहीं, लव मैरिज करने वाले 80 फीसद लोगों का रिश्ता कुछ समय बीतने के बाद खत्म हो जाता है। ऐसा उनका आपसी तालमेल या शादी से पहले कुछ और तथा बाद में कुछ और रवैये के कारण होता है।

    विवाह के बाद लड़ाई-झगड़े होने में किसी तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप करना भी एक बड़ा कारण है। यदि वैवाहिक जीवन खुशहाल बनाना है तो इन तमाम परिस्थितियों से बचना चाहिए।

    जन्म कुंडली में दोष है मुख्य कारण

    पति-पत्नी में लड़ाई-झगड़ा होने का सबसे बड़ा कारण वर-वधु की कुंडली में गुणों का कम या ज्यादा होना होता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार कुंडली में 18 गुण से कम का गुण मिलान हुआ है, तो झगड़े की आशंका अधिक होती है।

    शादी से पहले कुंडली मिलान करते समय मंगल दोष भी देखा जाता है। यदि एक की पत्रिका मंगली है और दूसरे की नहीं, तो ऐसी स्थिति में झगड़े की आशंका बनती है। वहीं वर-वधु के गुण-दोष का मिलान न होना, राशि मै‍त्री का न होना आदि बातें भी झगड़ों की वजह बनती है।

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    कुंडली में चतुर्थ स्थान को सुख स्थान कहा गया है और यदि चतुर्थ भाव या चतुर्थेश पाप ग्रहों युक्त होता है या चतुर्थेश निर्बल होता है तो पत्नी से झगड़ा या खिन्नता बनी रहती है।

    धार्मिक ग्रंथों में है उल्लेख

    मनुस्मृति में एक श्लोक में उल्लेख मिलता है कि पत्नी से कभी नहीं झगड़ना चाहिए। हालांकि इस श्लोक में ऐसे अन्य लोगों का उल्लेख है जिनसे लड़ाई-झगड़ा करने में हानि उठानी होती है।

    ऋत्विक्पुरोहिताचार्यैर्मातुलातिथिसंश्रितैः। बालवृद्धातुरैर्वैधैर्ज्ञा तिसम्बन्धिबांन्धवैः।

    मातापितृभ्यां यामीभिर्भ्रात्रा पुत्रेण भार्यया। दुहित्रा दासवर्गेण विवादं न समाचरेत्।।

    यानी यज्ञ करने वाले, पुरोहित, आचार्य, अतिथियों, मां, पिता, मामा आदि संबंधियों, भाई, बहन, पुत्र, पुत्री, पत्नी, पुत्रवधु, दामाद और गृहसेवकों से वाद-विवाद बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए।

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